पति, पत्नी और वो: रिश्तों के बीच छुपा एक राज
शहर की भीड़ में रहने वाले अमित और नेहा की शादी को सात साल हो चुके थे। दोनों की जिंदगी बाहर से बिल्कुल खुशहाल दिखाई देती थी। अमित एक निजी कंपनी में नौकरी करता था और नेहा घर संभालने के साथ-साथ ऑनलाइन काम भी करती थी।
लेकिन पिछले कुछ महीनों से नेहा को अमित के व्यवहार में बदलाव महसूस होने लगा था।
अमित पहले की तरह उससे बातें नहीं करता था। फोन हमेशा अपने पास रखता और किसी का मैसेज आते ही कमरे से बाहर चला जाता।
एक रात नेहा ने पूछा,
“अमित, आजकल तुम मुझसे कुछ छिपा रहे हो क्या?”
अमित ने मुस्कुराते हुए कहा,
“ऐसी कोई बात नहीं है। ऑफिस का काम थोड़ा ज्यादा है।”
नेहा ने बात तो मान ली, लेकिन उसके मन में शक पैदा हो चुका था।
कुछ दिनों बाद अमित के फोन पर एक मैसेज आया।
“कल शाम 7 बजे उसी जगह मिलना। बहुत जरूरी बात है।”
मैसेज पढ़कर नेहा परेशान हो गई।
अगले दिन अमित ऑफिस से निकलने के बाद सीधे घर नहीं आया। नेहा ने पहली बार उसका पीछा करने का फैसला किया।
अमित शहर के एक पुराने कैफे में पहुंचा। कुछ देर बाद वहां एक महिला आई।
नेहा ने दूर से दोनों को देखा और उसका दिल टूट गया।
महिला ने अमित का हाथ पकड़ते हुए कहा,
“अब हमें सच बता देना चाहिए।”
नेहा की आंखों में आंसू आ गए।
उसे लगा कि उसकी शादीशुदा जिंदगी में कोई तीसरा इंसान आ चुका है।
वह बिना अमित को बताए घर लौट आई।
रात को अमित घर पहुंचा तो नेहा चुपचाप बैठी थी।
अमित ने पूछा,
“क्या हुआ?”
नेहा ने कांपती आवाज में कहा,
“मुझसे झूठ मत बोलना। आज मैं तुम्हारा पीछा करके कैफे तक गई थी।”
अमित कुछ पल के लिए बिल्कुल शांत हो गया।
फिर उसने अपनी जेब से एक पुरानी तस्वीर निकाली।
“नेहा, जिस महिला से तुम आज मिलीं... वो मेरी पुरानी दोस्त नहीं, बल्कि मेरी बहन रिया की मां है।”
नेहा हैरान रह गई।
अमित ने बताया कि रिया उसकी छोटी बहन थी, जिसकी कई साल पहले एक दुर्घटना में मौत हो गई थी। उसकी छोटी बेटी की जिम्मेदारी अब उसी महिला के पास थी।
“मैं पिछले कुछ महीनों से रिया की बेटी की पढ़ाई और भविष्य के लिए पैसे जमा कर रहा था। मैं तुम्हें बताना चाहता था, लेकिन पहले सब कुछ ठीक करना चाहता था।”
नेहा की आंखों से आंसू बहने लगे।
उसने अमित से कहा,
“मुझे माफ कर दो। मुझे तुम पर शक नहीं करना चाहिए था।”
अमित ने उसका हाथ पकड़कर कहा,
“रिश्तों में सबसे जरूरी चीज प्यार नहीं, भरोसा होता है। प्यार बिना भरोसे के अधूरा है।”
उस दिन के बाद दोनों ने एक-दूसरे से कोई बात छिपाने का फैसला नहीं किया।
और जिस “वो” को नेहा अपने रिश्ते का दुश्मन समझ रही थी, वह दरअसल उनके परिवार का ही एक मासूम हिस्सा था।
कहानी की सीख
कई बार अधूरी जानकारी रिश्तों में गलतफहमियां पैदा कर देती है। किसी भी रिश्ते में फैसला लेने से पहले सच्चाई जानना और एक-दूसरे पर भरोसा करना बेहद जरूरी है।
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