लेकिन उस सुंदर जंगल में एक बड़ी परेशानी थी।
उस जंगल में एक बहुत ही ताकतवर और घमंडी शेर रहता था।
उसका नाम था सिंहराज।
सिंहराज को अपनी ताकत पर बहुत घमंड था। वह जब भी जंगल में निकलता, सारे जानवर डरकर अपने घरों में छिप जाते।
हिरन झाड़ियों में छिप जाते।
बंदर पेड़ों की सबसे ऊँची डालियों पर चढ़ जाते।
खरगोश अपने बिलों में घुस जाते।
और छोटे-छोटे पक्षी पेड़ों के पीछे छिपकर चुप हो जाते।
शेर की एक दहाड़ सुनते ही पूरा जंगल शांत हो जाता।
एक दिन शेर ने जंगल में घूमते हुए जोर से दहाड़ लगाई—
“सुनो जंगल के जानवरों! मैं इस जंगल का राजा हूँ। मेरी इजाजत के बिना यहाँ कोई नहीं घूमेगा!”
उसकी दहाड़ इतनी तेज थी कि पेड़ों पर बैठे पक्षी भी डरकर उड़ गए।
सभी जानवर बहुत परेशान हो चुके थे।
आखिर एक दिन जंगल के सबसे पुराने बरगद के पेड़ के नीचे सभी जानवरों की सभा बुलाई गई।
हिरन बोला,
“अगर यह ऐसे ही चलता रहा तो एक दिन जंगल में कोई जानवर नहीं बचेगा।”
बंदर ने कहा,
“लेकिन हम शेर से लड़ भी नहीं सकते। वह हम सब से ज्यादा ताकतवर है।”
तभी एक बूढ़े हाथी ने शांत आवाज़ में कहा,
“हमें शेर से ताकत के बल पर नहीं, बल्कि समझदारी से निपटना होगा।”
सभी जानवर सोचने लगे।
काफी देर बाद एक योजना बनाई गई।
अगले दिन सभी जानवर शेर के पास पहुँचे।
हाथी ने कहा,
“महाराज, हम आपकी ताकत को जानते हैं। आप हमारे राजा हैं। लेकिन अगर आप रोज जंगल में शिकार करेंगे, तो बहुत जल्द जंगल खाली हो जाएगा।”
शेर ने गुर्राते हुए पूछा,
“तो मैं क्या करूँ?”
हाथी ने कहा,
“हम रोज़ अपनी ओर से एक जानवर आपके पास भेज दिया करेंगे। आपको शिकार करने के लिए जंगल में घूमना नहीं पड़ेगा।”
शेर ने कुछ देर सोचा।
फिर मुस्कुराकर बोला,
“ठीक है। लेकिन ध्यान रखना—जिस दिन कोई जानवर मेरे पास नहीं आया, उस दिन मैं पूरे जंगल में घूमकर जितने जानवर मिलेंगे, सबको खा जाऊँगा!”
सभी जानवर डर गए।
लेकिन उनके पास कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था।
अगले दिन एक हिरन शेर के पास गया।
उसके अगले दिन एक जंगली सूअर गया।
फिर एक बंदर।
फिर एक नीलगाय।
इसी तरह कई दिन बीत गए।
एक सुबह जंगल में रहने वाले छोटे से खरगोश की बारी आ गई।
खरगोश का नाम था चीकू।
चीकू बहुत छोटा था, लेकिन उसकी बुद्धि बहुत तेज थी।
जब उसे पता चला कि आज उसे शेर के पास जाना है, तो वह कुछ देर चुपचाप बैठा रहा।
उसकी आँखों में डर जरूर था, लेकिन उसके दिमाग में एक विचार तेजी से घूम रहा था।
वह सोचने लगा—
“अगर मैं भी शेर के पास चला गया, तो वह मुझे खा जाएगा। लेकिन अगर मैं नहीं गया, तो वह पूरे जंगल के जानवरों को मार देगा।”
चीकू ने अपनी आँखें बंद कीं और गहरी साँस ली।
फिर अचानक उसकी आँखों में चमक आ गई।
“मुझे एक तरकीब सूझ गई!”
चीकू जंगल के रास्ते पर चल पड़ा।
लेकिन वह सीधे शेर की गुफा की ओर नहीं गया।
वह जानबूझकर धीरे-धीरे चलने लगा।
कभी पेड़ के पीछे छिपता।
कभी झाड़ियों में रुकता।
कभी इधर-उधर देखकर मुस्कुराता।
कई घंटे बाद वह शेर की गुफा के पास पहुँचा।
सिंहराज पहले से ही बहुत गुस्से में उसका इंतजार कर रहा था।
जैसे ही उसने चीकू को देखा, वह जोर से दहाड़ा—
“इतनी देर क्यों हुई?”
चीकू डरने का नाटक करते हुए काँपने लगा।
“म... महाराज... मुझे माफ कर दीजिए!”
शेर ने गरजकर कहा—
“आज तुम्हें कोई नहीं बचा सकता!”
चीकू ने धीरे से कहा—
“महाराज, मैं अपनी गलती से देर से नहीं आया।”
शेर ने आँखें सिकोड़कर पूछा—
“तो फिर किसकी गलती है?”
चीकू ने चारों तरफ देखा और बहुत धीमी आवाज में कहा—
“महाराज... रास्ते में एक दूसरा शेर मिल गया था।”
शेर एकदम शांत हो गया।
“क्या कहा?”
चीकू बोला,
“एक दूसरा शेर!”
सिंहराज गुस्से से दहाड़ा—
“इस जंगल में दूसरा शेर? वह कौन है?”
चीकू बोला,
“महाराज, वह खुद को इस जंगल का असली राजा बता रहा था।”
यह सुनते ही शेर का चेहरा गुस्से से लाल हो गया।
“मुझे उसके पास ले चलो!”
चीकू थोड़ा पीछे हटते हुए बोला,
“महाराज, वह बहुत ताकतवर है।”
शेर गरजा,
“मैं उससे ज्यादा ताकतवर हूँ!”
चीकू ने कहा,
“लेकिन महाराज, उसने कहा कि आप सिर्फ नाम के राजा हैं।”
शेर की आँखें गुस्से से चमक उठीं।
“क्या उसने ऐसा कहा?”
“जी महाराज।”
“अभी चलो!”
चीकू मन ही मन मुस्कुराया।
उसकी योजना का पहला हिस्सा सफल हो चुका था।
चीकू शेर को जंगल के एक सुनसान हिस्से की ओर ले जाने लगा।
रास्ता बहुत घना था।
पेड़ों की शाखाएँ आपस में उलझी हुई थीं।
हवा तेज चल रही थी।
सूखे पत्तों की आवाज़ चारों ओर सुनाई दे रही थी।
कुछ दूर चलने के बाद चीकू अचानक रुक गया।
शेर ने पूछा,
“अब क्या हुआ?”
चीकू ने डरते हुए कहा,
“महाराज... मुझे लगता है वह हमें देख रहा है।”
शेर ने चारों ओर देखा।
“कहाँ है?”
चीकू ने सामने एक पुराने कुएँ की ओर इशारा किया।
“वह... उस कुएँ के अंदर है।”
शेर तेजी से कुएँ के पास पहुँचा।
उसने नीचे झाँका।
पानी बिल्कुल शांत था।
लेकिन पानी में शेर को अपनी ही परछाईं दिखाई दी।
चीकू थोड़ी दूरी पर खड़ा होकर बोला—
“महाराज... वही है!”
शेर ने कुएँ में देखा और जोर से दहाड़ा—
“कौन है तू?”
कुएँ के अंदर से आवाज आई—
“कौन है तू... तू... तू...”
शेर हैरान रह गया।
उसने फिर दहाड़कर कहा—
“मैं इस जंगल का राजा हूँ!”
कुएँ से आवाज आई—
“मैं इस जंगल का राजा हूँ... राजा हूँ... राजा हूँ...”
शेर का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया।
उसने चीकू से कहा—
“देखा! वह मेरी आवाज की नकल करके मेरा मजाक उड़ा रहा है!”
चीकू ने मासूमियत से कहा—
“महाराज, शायद वह आपको चुनौती दे रहा है।”
शेर ने जोर से दहाड़ लगाई।
“बाहर निकल!”
फिर वही आवाज वापस आई—
“बाहर निकल... निकल... निकल...”
शेर अब अपना आपा खो चुका था।
उसने सोचा—
“आज मैं इस घमंडी शेर को खत्म कर दूँगा!”
और बिना कुछ सोचे वह कुएँ के अंदर छलाँग लगा बैठा।
छपाक!
पानी चारों तरफ उछल पड़ा।
चीकू तुरंत पीछे हट गया।
कुछ पल बाद शेर पानी से बाहर निकलने की कोशिश करने लगा।
लेकिन कुआँ बहुत गहरा था और उसकी दीवारें चिकनी थीं।
शेर जितना ऊपर चढ़ने की कोशिश करता, उतना ही वापस नीचे फिसल जाता।
“मुझे बाहर निकालो!”
शेर चिल्लाया।
चीकू सुरक्षित दूरी पर खड़ा था।
उसने कहा—
“महाराज, आप तो जंगल के सबसे ताकतवर राजा हैं। फिर आपको मेरी मदद की क्या जरूरत?”
शेर कुछ नहीं बोल पाया।
चीकू मुस्कुराया और बोला—
“आपने अपनी ताकत पर बहुत घमंड किया। लेकिन आज एक छोटे से खरगोश की बुद्धि ने आपकी सारी ताकत को मात दे दी।”
यह कहकर चीकू जंगल की ओर दौड़ पड़ा।
कुछ ही देर में वह सभी जानवरों के पास पहुँच गया।
“शेर अब किसी को परेशान नहीं करेगा!”
सभी जानवरों को पहले तो विश्वास नहीं हुआ।
लेकिन जब उन्हें सच्चाई पता चली, तो पूरा जंगल खुशी से झूम उठा।
बंदर पेड़ों पर उछलने लगे।
हिरन खुले मैदान में दौड़ने लगे।
पक्षी खुशी से चहचहाने लगे।
और छोटे-छोटे खरगोश चीकू के चारों ओर जमा होकर बोले—
“चीकू की जय!”
चीकू हँसते हुए बोला—
“मेरी नहीं, बुद्धि की जय!”
उस दिन से जंगल में सभी जानवर मिल-जुलकर रहने लगे।
और उन्होंने एक बात हमेशा के लिए याद रख ली—
सीख
ताकत पर घमंड करने वाला व्यक्ति हमेशा शक्तिशाली नहीं होता। सही समय पर इस्तेमाल की गई बुद्धि और समझदारी बड़ी से बड़ी ताकत को भी मात दे सकती है।