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सोमवार, 9 अगस्त 2021

Dashama vrat katha 2021

अगस्त 09, 2021 0
Dashama vrat katha 2021
દશામાં વ્રત કથા

અમદાવાદમાં જતીનભાઈ કરીને એક યુવાન ખુરશીનો ધંધો કરતો હતો. થોડી ઘણી આવક થાય ત્યાં કંઈને કંઈ એવું બનીને ઊભું રહે કે ભેગા થયેલા પૈસા જતા રહે. આમ વેપારમાં કોઈ ખાસ બરકત આવતી નહોતી. જો કે તેમનું ગાડું ગબડ્યું જતું હતું.

એક દિવસ જતીનભાઈ ખુરશી વેચવા જતા હતા. ત્યાં રસ્તામાં તેનો પગ લપસ્યો અને હાંડકું ભાંગી ગયું. વેપાર ઠપ થઈ ગયો. આવકનું થોડું ઘણું સાધન હતું તે પણ ઝુંટવાઈ ગયું.

જતીનભાઈ ના પત્નિ રેખા સ્વભાવે ઘણી ધર્મપરાયણ. તેને ભગવાન ઉપર અપાર શ્રદ્ધા હતી. કાયમ ભજન - કીર્તનમાં મગ્ન રહે. ઘેર મહિનામાં એકાદવાર તો ભજનમંડળી બોલાવી ભજનનો કાર્યક્રમ રાખે જ. 

આષાઢ વદ અમાસ આવી.

રેખાએ દશામાનુ વ્રત લીધું અને દશા સુધારવા દશામાને પ્રાર્થના કરી. એક દિવસે તે ભજન ગાન માટે ગઈ હતી ત્યારે જતીનભાઈ ઘેર એકલા ખાટલા પર પડેલા હતા. એક ડોશીમાં આયા અને જતીનભાઈના ખબર અંતર પૂછયા. પછી તેમણે થેલી કાઢી પ,૦૦૦ રૂપિયા આપતાં કહ્યું, “ભાઈ જતીન , આ ૫,૦૦૦ રૂપિયા લે અને ખુરશીનો ધંધો ફરી શરૂ કર. તારો પગ પણ થોડા દિવસમાં સારો થઈ જશેે. આ વેળા તને ખુરશીના વેેેેેપારમાં સારો એવો નફો થશે."

“પણ માજી , તમો આવો છો ક્યાંથી, ”જતીનભાઈએ પૂછ્યું. 

"અમદાવાદના દાણાપીઠમાંથી."

અને ડોશીમાં તો ઉભા થઈ ચાલવા માંડ્યા.

એવામાં રેખા ઘેર પાછી ફરી. જતીનભાઈએ ડોશીમાની વાત કરી એ જ રીતે રેખાને સપનામાં દશામાએ દર્શન દીધા અને કહ્યું, “બેટા, હું ડોશીમાં બનીને તારા ઘેર આવી હતી. તે મારૂં વ્રત રાખ્યું એટલે હવે તારી દશા સુધરશે. વેપારમાં જે નફો થાય તેનો અમુક હિસ્સો દાનપુણ્યમાં વાપરજે.”

રેખા એ દશામાનું વ્રત પુરું કર્યું.

જતીનભાઈનો પગ ઠીક થઈ ગયો અને ડોશીમાએ આપેલા પ,૦૦૦ રૂપિયાથી તેમણે ખુરશીના વેપારની ફરી શરૂઆત કરી. એક જ વર્ષમાં તેમને બમણો નફો થયો.

તેઓ દાણાપીઠમાં ગયા અને પેલા ડોશીમાની તપાસ કરી તો તે ન મળ્યા પણ ખબર પડી કે ત્યાં દશામાનું મંદિર હતું. તેને દશામાના દર્શન કર્યા અને ૧૦,૦૦૦ રૂપિયાનું દાન કર્યું. 

દશામા જેવા જતીનભાઈ અને રેખા ને ફળ્યાં તેમ સર્વને ફળજો. વ્રત કરનાર, વાર્તા લખનાર, વાર્તા વાંચનાર સર્વની દશા સુધારજો. સુખસંપત્તિ અને સંતતિ આપો. શ્રદ્ધા અને વિશ્વાસ અને સંનિષ્ઠા પ્રદાન કરજો.

જય દશામા !

गुरुवार, 25 मार्च 2021

Badal Gayi Aulad

मार्च 25, 2021 0
Badal Gayi Aulad
BADAL GAYI AULAD

माँ की दुआ कभी खाली नहीं जाती। और माँ की दुआ देवताओं से भी टाली नही जाती। चार बच्चों को बर्तन मांज कर भी पाल लेती हैं एक माँ पर बहु आ जाने के बाद उन चार बेटो पर एक माँ पाली नही जाती। अरे भूल गए वो दिन, भूल गए कि जिस माँ ने हमको अपना दूध पिलाया हैं और पिताने उंगली पकड़के चलना सिखाया हैं। लेकिन जब औलाद बड़ी हो जाती हैं तो उन्हीं माँ और बाप को ठोकर मारती हैं तो, पड़ती हैं दिलो पर मार मगर माँ का प्यार नही बदलेगा, आखिर माँ - माँ होती हैं। और बदल गई औलाद मगर माँ बाप नही बदलें। तू बदलेगा सो बार मगर माँ बाप नहीं बदले। बदल गई औलाद मगर माँ बाप नही बदलें।

जिस माँ ने हमको अपना दूध पिलाया हैं और पिताने उंगली पकड़के चलना सिखाया हैं। लेकिन जब वही औलाद माँ बाप को ढोकर मारती हैं तो माँ और बाप के दिल पे केसी चोट पहोचती हैं। फिर भी दोस्तो कहाँ जाता हैं कि माँ का दिल लाजवाब होता हैं। प्यार इसमें बेहिसाब होता हैं, कोई बेटा माँ से प्यार करे या ना करे लेकिन माँ को अपने हर बेटे से प्यार होता हैं। माँ ही मंदिर और माँ ही तीर्थ होती हैं। माँ के चरणों मे यारो जन्नत होती हैं।

और पिता क्या होता हैं?

और पिता हैं जन्नत द्वार, पिता का प्यार नही बदले, बदल गई औलाद मगर माँ बाप नहीं बदले।

"हर रिश्ते में मिलावट देखी,
कच्चे रंगों की सजावट देखी,
लेकिन सालों साल देखा हैं मां को
उसके चेहरे पर ना कभी थकावट देखी,
ना ममता में कभी मिलावट देखी।"

लेकिन यारो आजकल होता क्या हैं फिकरों से चहेरे पे जुरिया पड़ गई उन माँ बाप के, बीवी घर में आई तो हवेलियां बदल गई, और ये बात और थी कि पहेले कमाई माँ को देते थे। अब फ़र्क इतना हैं कि हाथों की हथेलिया बदल गई।


लेकिन एक बात याद रखना माँ बाप के दिल को जो औलाद दुखाति है। सच कहता हूं वो घोर नर्क में जाती हैं। बचपन से, अरे माँ ने बचपन से पाला इतना बड़ा किया, अरे याद कर जब तू बिस्तर गीला कर देता था तो माँ गिले में सो जाती थी और तुजे सूखे में सुलाती। लेकिन आज हँसा हँसा के रुलाने की बात करता हैं। अरे तू उनके दिल को दुखाने की बात करता हैं। अरे नादान जिसके लिए आज मेंने सबकुछ छोड़ दिया अगर आज तू उन माँ बाप को छोड़ने की बात करता हैं। औलाद जो माँ और बाप के दिल को दुखाती हैं सच कहता हूं वो घोर नर्क में जाती हैं। बचपन से हो गए बड़े मगर माँ और बाप नहीं बदले मगर बदल गई औलाद और माँ बाप नहीं बदले।


तू बदले सो बार मगर माँ बाप नहीं बदले, बदल गई औलाद मगर माँ - बाप नहीं बदले।
     
इज्जत भी मिलेगी
दौलत भी मिलेगी
सेवा करो माँ - बाप की 
जन्नत भी मिलेगी



गुरुवार, 24 दिसंबर 2020

पिता ने तोड़ दिया धागा

दिसंबर 24, 2020 0
पिता ने तोड़ दिया धागा
पिता ने तोड़ दिया धागा


एक बार की बात हैं, एक पिता अपने बेटे के साथ पतंग उड़ा रहा था। पतंग आसमान में बादलों को छूती हुई, हवा के साथ लहरा रही थी। थोड़ी देर बाद बेटे ने पिता से पूछा कि पतंग घागे की वजह से ऊपर नहीं जा पा रही है। अगर हम इस धागे को तोड़ देते हैं तो पतंग और ऊपर जा सकती हैं। ये बात सुनने के बाद पिता ने तुरंत ही उस धागे को तोड़ दिया। धागे को तोड़ने के बाद पतंग हवा के साथ साथ ऊपर जाने लगी। लेकिन थोड़ी ही देर बाद वह पतंग लहराकर नीचे आने लगी, और दूर कहीं जाकर जमीन पर जाकर गिर गई। ये देखकर बेटे ने पिता से पूछा की धागा तोड़ देने पर पतंग को और ऊँचाई पर जाना चाहिए था। धागे की वजह से पतंग ज्यादा ऊपर नहीं जा पा रही थी । क्योंकि धागा उसे खिंच रहा था।

लेकिन जब हमने धागा तोड़ दिया तो फिर पतंग नीचे क्यों आकर गिर गई। ऐसा क्यों हुआ यह नीचे क्यों आ गई। इस बात पर उसके पिता ने उसे कहा जिंदगी में हम जिस ऊंचाई पर हैं वहां हमें अक्सर लगता है की कुछ चीजें जिनसे हम बंधे हुए हैं वह हमें जिंदगी की ऊंचाइयों को छूने से रोक रही है। जैसे कि, माता-पिता, अनुशासन या परिवार। इसलिए हमारे मन में ऐसे विचार आते हैं कि हमें उनसे आजाद होना चाहिए। ताकि हम जिंदगी के ऊंचाई को और छु सके। लेकिन जिस प्रकार पतंग धागे से बंधी हुई हैं ठीक उसी प्रकार हम भी इन से बंधे हुए हैं। वास्तव में यही वह धागा होता है जो हमें उस ऊंचाई पर बनाए रखता है।

अगर तुम इस धागे को तोड़ दोगे तो तुम एक बार तो उस पतंग की तरह ऊंचाई पर तो जाओगे लेकिन बाद में उसी पतंग की तरह जमीन पर गिर जाओगे। जब तक वो पतंग घागे से बंधी रहेगी। तब तक वह आसमान की ऊंचाइयों को छूती रहेगी। अगर तुम जिन्दगी में ऊंचाइयों पर बने रहना चाहते हो। तो इन धागो से रिश्ता मत तोड़ना। क्योंकि जीवन में सफलता पूरे परिवार के संतुलन से ही मिलती है। कभी-कभी हमें ऐसा लगता है, कि हमारे माँ बाप हमे आगे बढ़ने से रोक रहे हैं। पर ऐसा बिल्कुल भी नही हैं। हमारे माँ बाप हमे आगे बढ़ने से नहीं रोक रहे हैं। वे तो रोक टोक करके उस धागे को टूटने से बचाना चाहते हैं। क्योंकि वह जानते हैं कि अगर यह धागा टूट गया तो तुम जिंदगी में ऊंचाइयों को कभी भी छू नहीं पाओगे। "माँ" एक ऐसी बैंक है जहां आप हर भावना और दुख जमा कर सकते हो। और "पिता" एक ऐसा क्रेडिट कार्ड है जिसके पास बैलेंस ना होते हुए भी हमारे हर सपने को पूरे करने की कोशिश करता है।

"परिवार" से बड़ा कोई "धन" नहीं। "पिता" से बड़ा कोई "सलाहकार" नहीं। माँ की ममता से बड़ी कोई छांव नहीं। "भाई" से अच्छा कोई "भागीदार" नहीं। और "बहन" से बड़ा कोई "शुभचिंतक" नहीं। "परिवार" के बिना "जीवन" जीवन नहीं होता। दोस्तो जिंदगी में सभी आगे बढ़ना चाहते हैं। इसलिए अपने सपनों से उतना प्यार कीजिए। जितना आप अपने परिवार और माता-पिता से करते है।

सोमवार, 14 दिसंबर 2020

IG RAHUL NAME OF SUCCESS

दिसंबर 14, 2020 0
IG RAHUL NAME OF SUCCESS
   
(IG RAHUL)  

IG RAHUL IS LIVE GAMING JURNY


गुजरात राज्य के हालोल तालुका में एक छोटा सा गाँव कोपरेज हैं। जिसमें कांतिलाल केसरीसिंह का पौत्र राहुल सिंह दीपक सिंह रहेता हैं। राहुल का जन्म वडोदरा जिल्ला में 15 दिसम्बर 1998 में हुआ था। राहुल की 3 बहेन हैं ट्विंकल, काजल और उर्मी। 

राहुल की फैमिली में सब चाहते थे कि राहुल इंजीनियरी करे, लेकिन राहुल को तो गेंमिंग और यु ट्युब में अपना नाम बनाना था, वो ही राहुल का सपना था। फिर राहुल ने वही किया और आज लोग राहुल को यु ट्यूब कम्युनिटी में राहुल नही बल्कि IG RAHUL के नाम से ज्यादा जानते हैं।

राहुल को गेंमिंग में इंटरेस्ट तो पहले से ही हैं, लेकिन राहुल जब 6th क्लास में आया तब उसे गेम में और ज्यादा इंटरेस्ट आने लगा। अब राहुल को गेम में इतना इंटरेस्ट आने लगा कि पढ़ाई से ज्यादा गेम ही दिखता था। राहुल ने गेम लेने की ज़िद की। लेकिन उसको पहेले तो गेम नहीं दिलाई। जब गेम नहीं दिलाने पर राहुल को गुस्सा आया और उसने 6th क्लास की एग्जाम नहीं दी, तब उसके पापा ने राहुल को पहेली बार मारा था। फिर उसको गेम तो मिल ही गई थीं। 6th में राहुल की दादी जी ने राहुल को video game दीलिए थी। फिर राहुल बहोत ही अलग अलग गेम खेलता था। जैसे कि, GTA, CS-GO जैसी बडी गेम्स और छोटी गेम्स भी बहोत खेली। उस टाइम राहुल के पास मोबाइल तो था ही नहीं। फिर उसके दादा जी ने राहुल को कॉलेज के 1st साल में मोबाइल दिलाया।

राहुल को गेम के अलावा स्पोर्ट में भी इंटरेस्ट था। 2016 में वॉलीबॉल में राहुल ने स्टेट लेवेल तक खेला था। उसकी तबियत खराब हो जाने की वजह से उस टाइम वो खेल नही पाया था। और फिर उस टाइम से वो किसी भी स्पोर्ट में खेल नही पाया।

राहुल की जर्नी 2017 से स्टार्ट हुई। स्टार्टिंग में राहुल के पास मोबाइल जैसा कुछ नही था। फिर धीरे धीरे Video game मेसे फ़ोन में कन्वर्ट हुए। राहुल का एक फ्रेंड हैं केतन परमार। राहुल जब केतन के घर गया था तब केतन ने राहुल के फ़ोन में PUBG इनस्टॉल कर के दी थी। और केतन ने राहुल से बोला कि चल राहुल PUBG खेलते हैं। तो राहुल ने PUBG खेलना शुरू किया लेकिन राहुल को तो कुछ समझ ही नही आ रहा था गेम में की कैसे खेले PUBG। फिर राहुल ने घर जाके PUBG को डिलेट कर दिया। फिर थोड़े दिन बाद उसने फिर से PUBG इंस्टॉल कर दी।

फिर कुछ दिन बाद राहुल सुरत रहने गया। वहाँ पे राहुल की कझिन सिस्टर (वैष्णवी) और राहुल का भाई (धवल) दोनों ने राहुल के फोन में उस गेम को देखा और उन दोनों को उस गेम में ग्राफिक्स ये सब अच्छा लगा। फिर भी राहुल ने तो उस पर कुछ खास ध्यान नहीं दिया। फिर दीवाली वेकेशन आया सब कझिन भाई बहन इकठा हुए। फिर राहुल की कझिन सिस्टर (वैष्णवी) ने राहुल के मन मे इस गेम को लेकर थोडा और इंटरेस्ट दाल दिया। 

उसकी कझिन सिस्टर (वैष्णवी) ने राहुल को एक सुझाव दिया उसने राहुल को  यू ट्यूब पे Dynamo Gaming चेनल देखने को कहा उस पे अच्छी खासी अर्निंग हो रही थी, इससे कुछ आईडिया मिल जाये। राहुल सोचता हैं कि यू ट्यूब पे अर्निंग अच्छी हो रही हैं, तो राहुल को उसे देखकर थोड़ा आईडिया मिला।

नवंबर 2017 में राहुल ने यु ट्यूब चेनल स्टार्ट किया। यु ट्युब चेनल का सुझाव कझिन बहन ( वैष्णवी) ने दिया था। जब यु ट्युब स्टार्ट किया तब राहुल को तो कुछ समझ नही आ रहा था कि क्या करें, कैसे करे, थोड़े टाइम के लिए तो यु ट्युब चैनल ऐसी ही पड़ी रही थी। लेकिन राहुल को तो गेम में कुछ करके दिखाना था। बाद में थोड़े टाइम के बाद थोड़ा थोड़ा उसको समझ आने लगा कि क्या करना हैं। फिर थोड़े टाइम के बाद गेम में ग्रोथ होने लगा।

राहुल का फ्रेंड दीप जो साबरकांठा में रहता हैं और भावेश गुप्ता जो मुंबई में रहेता हैं उन दोनों ने बहोत सपोर्ट किया हैं राहुल को।

जब इन्डिया में PUBG बैन हुई तब राहुल ने एक गेम हैं जिसका नाम Call of duty mobile उसमें अच्छा ग्रोथ कर लिया था। अब राहुल धीरे धीरे यू ट्यूब पे वीडियो डालता गया।

राहुल की फैमिली राहुल के गेंमिंग के ख़िलाफ़ हैं और आज भी राहुल की फैमिली राहुल के गेंमिंग के ख़िलाफ़ ही हैं।

पंचमहाल जिल्ला के हालोल तालुका में अभी तक कोई गेंमिंग क्रिएटर्स नही हैं। और कोई सक्सेस गेमर नहीं हैं, जो IG RAHUL IS LIVE हैं। जिसे आज लोग राहुल से ज्यादा (IG RAHUL) के नाम से जानते हैं। जिन्हों ने अपना नाम यु ट्युब और गेंमिंग कम्युनिटी में बनाया।

राहुल का सपना हैं कि किसी लेंड टूर्नामेंट में इन्डिया का झंडा लहराना। इसके अलावा राहुल ने अभी हाल ही मैं E-SPORTS ऑर्गनाइजेशन भी बनाया हैं FG E-SPORTS। जिसके जरिये राहुल और उसकी टीम हर गेम में इन्डिया को रिप्रेजेंट करना चाहती हैं।

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Ig rahulyt -instagram

YOUTUBE

IG RAHUL IS LIVE


बुधवार, 25 नवंबर 2020

माँ और बेटा

नवंबर 25, 2020 0
माँ और बेटा
क्या आप बता सकते हैं, की इस दुनिया की सबसे मूल्यवान वस्तु क्या हैं?
भगवान भी जिसका प्यार पाने के लिए तरसता हैं।
आखिर वो चीज़ हैं क्या?
इस कहानी में इसी सवाल का जवाब छुपा हुआ हैं।

एक छोटे से गाँव में छोटू नाम का एक लड़का रहता था। वो अपनी माँ से कभी भी ठीक से बात नहीं करता था। हमेशा अपनी माँ को भला बुरा बोलता रहता था। और बहोत कड़वी बातें करता था अपनी माँ से, क्योंकि छोटू की माँ का आधा चेहरा आग से जल गया था। और उसके चेहरे पर दाग रेह गए थे। उसकी वजह से उनका चेहरा बहुत भयंकर दिख रहा था। छोटू इस बात को लेकर बहुत दुखी रहता की उसकी माँ खूबसूरत क्यों नहीं हैं। मेरे सभी दोस्तों की माँ खूबसूरत हैं। सब मेरा मज़ाक उड़ाते हैं।

एक दिन वो खेल रहा था। तब सब बच्चे की माँ अपने अपने बच्चों को घर ले जाने के लिए आई। तभी छोटू ने कहा, की थोड़ी देर और खेलने दो ना। तभी एक बच्चे की माँ बोली छोटू तुम्हारी माँ तुम्हें दाटती नहीं हैं क्या? जो तुम इतना खेलते हो। तभी छोटू ने कहा कि में तो यहा सिर्फ अपने पापा के साथ रेहता हूं। माँ तो यहाँ नही रेहती। तभी छोटू की माँ वहा आती हैं और सब सुन लेती हैं और वो वहा से वापस घर चली जाती हैं।

दूसरे दिन जब छोटू के दोस्त उसके घर आये उसे खेलने के लिए बुलाने तब उसकी माँ बाहर जाती है। सब छोटू की माँ को देखकर सब बच्चे वहाँ से भाग गए क्योंकि छोटू की माँ का चेहरा जला हुआ था इसलिए सब डर के चले गये। फिर छोटू ने अपनी माँ से कहा कि, कितनी बार बोला मेरे दोस्तो के सामने मत आया करो। अब कोई मेरे साथ नहीं खेलेंगे, सब मेरा मजाक उड़ाएंगे, सब आपकी वजह से हुआ। ऐसी कई बाते छोटू ने अपनी माँ को सुनाई। छोटू ने कहा कि आप यहां से चले जाओ वरना में ही चला जाता हु। ऐसा बोल कर छोटू घर छोड़ कर भाग जाता हैं। वो जंगल में चला जाता हैं।

और थोड़ी देर बाद छोटू का पिता उसे ढूंढता हुआ जंगल में आता हैं, और उसके पास बैठ जाता हैं। और छोटू के पिता छोटू से पूछता हैं कि तुम अपनी माँ से इतना गुस्सा क्यों रहते हो। तभी गोलू ने बताया कि मां खूबसूरत नहीं हैं। इसलिए मेरे दोस्त मुझे साथ में नहीं खेलने देते सब मुझे चिड़ाते हैं। तभी छोटू के पापा ने बताया कि उसका चेहरा ऐसा क्यों गया पता हैं तुम्हें? तभी छोटू ने कहा नहीं मुजे नही मालूम आप बताओ। तभी छोटू के पापा ने बताया कि,

जब तुम छोटे थे तब तुम्हारी माँ तुम्हें सुलाक़े राशन लेने गई थीं। जब राशन लेकर वापस आई तो देखा कि घर में आग लगी थी और तुम अन्दर थे। तुम्हारे ऊपर छत गिरने वाली थी, लेकिन तुम्हारी माँ तुम्हें बचाने के लिए बीच में आ गई और छत तुम्हारी माँ के ऊपर गिर गई। तुम्हें तो बचा लिया लेकिन तुम्हारी माँ ने अपनी खूबसूरती खो दी।

ये सुनकर वो रोने लगा और वो भागता हुआ अपनी माँ के पास चला गया और घर जाकर अपनी माँ से माफी मांगी और खूब रोने लगा। और कहा कि में तुम्हें कभी भी भला बुरा नहीं कहूंगा और आपकी सारी बाते मानूंगा।

माँ प्यार और ममता का प्रतिक हैं, उसकी सेवा और सम्मान करना हमारा कर्तव्य हैं। मा से मूल्यवान इस दुनिया में और कुछ भी नहीं, वो माँ ही हैं जिसका प्यार पाने के लिए भगवान भी तरसता हैं।

छोटू को इस बात का एहसास हुआ कि माँ की खूबसूरती चेहरे में नहीं बल्कि ममता में छुपी होती हैं।







शनिवार, 14 नवंबर 2020

सकारात्मक दृष्टिकोण का एक नमूना

नवंबर 14, 2020 0
सकारात्मक दृष्टिकोण का एक नमूना


एक बार एक महान व्यक्तित्व वाला व्यक्ति एक बैंक मैनेजर के पास गया और कहा : "मुझे 6 महीने के लिए बीस हजार का लोन चाहिए।"

मैनेजर ने इसे ऊपर से नीचे तक मापा और फिर पूछा : "लोन तो मिल जायेगा, लेकिन क्या आपके पास गिरवी रखने के लिए कुछ हैं ?"



उसने कहा : हा, मेरे पास एक मर्सिडीज कार हैं। मैं उस कार को गिरवी रख सकता हूं। ये कार के दस्तावेज हैं।

मैनेजर ने सभी दस्तावेजों की जांच की और पूर्ण पुष्टि प्राप्त करनें के बाद, आवश्यक सही सिक्को और हस्ताक्षर करके लोन दिया।

मैनेजर ने उस भाई की कार को बैंक में सुरक्षित रख दिया।

उस बात को 6 महीने हो गए।

वो भाई बैंक आया और बैंक की लोन चुका दी। ब्याज जो भी वसूला गया हो उसका भी भुगतान कर दिया। फिर उसने अपनी कार ली और जाने के लिए तैयार हो गया।

बैंक मैनेजर हैरान रह गया।

बैंक मेनेजर जानने को उत्सुक था। मर्सिडीज कार के मालिक को केवल बीस हजार की आवश्यकता क्यों हैं ?

तो बैंक मैनेजर ने पूछा : भाई, मैं अब भी नहीं समझ पाया कि इतनी महंगी मर्सिडीज कार के मालिक को इतनी छोटी रकम की लोन लेने की जरूरत क्यों पड़ी ?

भाई ने हंसते हुए कहा : "अगर आपने पूछा हैं, तो मैं आपकों बताता हूँ।"

मुझे लोन की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन मुझे लगा कि में अपनी कार को मामूली ब्याज पर बैंक में सुरक्षित रख कर विदेश जा सकता हूं। तो में इतने कम किराए पर कार को और कहां सुरक्षित रखू ?

बैंक मैनेजर जवाब सुनकर हैरान हो गया।

बैंक मैनेजर उस व्यक्ति के बारे में जैसा सोच रहा था, वैसा तो कुछ भी नहीं था।


यह सकारात्मक दृष्टिकोण का एक नमूना हैं। जिसे उस व्यक्ति ने रचनात्मक रूप से हल किया। आपको अपने जीवन में इसी तरह निर्णय लेने होंगे। जब लोगो को आप पर पूरा विश्वास होने लगता हैं, तो आपके सभी असंभव कार्य आसानी से पूरे होने लगते हैं।

सोमवार, 26 अक्टूबर 2020

परिवार और माँ (तीन भाई एक बहन की कहानी)

अक्टूबर 26, 2020 0
परिवार और माँ (तीन भाई एक बहन की कहानी)
एक गाँव में एक सुखी परिवार रहता था। उस परिवार में तीन भाई और एक बहन थीं।

उनके माँ बाप उन चारों सें बेहद प्यार करतें थें। मगर बीच वाले बेटे से थोड़ा परेशान थें। क्योंकि बड़ा बेटा पढ़ लिखकर डॉक्टर बन गया और छोटा बेटा भी पढ़ लिखकर इंजीनियर बन गया था।

मगर उनका बीच वाला बेटा बिल्कुल गवार और आवारा ही बनकर रह गया। अब उनके दो बेटे डॉक्टर और इंजीनियर नें शादी भी कर ली थीं।

और कुछ महीनों के बाद ही उनकी बेटी की भी एक अच्छे घराने में शादी हो गई थीं। मगर बीच वाला बेटा अभी भी कुँवारा ही था। क्योंकि वो बिल्कुल अनपढ़ था और कहीं पर मजदूरी का छोटा सा काम करता था।

इसलिए उसे शादी के लिए कोई भी लड़की नहीं मिल रही थीं। और उसके माँ बाप उससे बहुत परेशान हो चुके थें। अब जब भी उसकी बहन अपने मायके आती तो पहले वो अपने डॉक्टर और इंजीनियर भाइयों से मिलती थीं।

मगर बीच वाले भाई से वो बहुत कम मिलती थीं। क्योंकि वो उसे ज्यादा पैसे नहीं दे पाता था। लेकिन फिर भी वो अपनी बहन से बहुत प्यार करता था। अब उनके पिताजी की बीच वाले बेटे की शादी किये बिना ही मृत्यु हो गयी।

उनकी माँ ने सोचा कहीं अब किसी के मुँह से बटवारे की बात न निकले इसलिए अपनें ही गाँव की एक सीधी साधी लड़की से अपनें गवार लड़के की शादी करवा दी। शादी होते ही न जाने क्या हुआ।

अब उसका अनपढ़ बेटा पूरा मन लगाकर काम करने लगा। और पहले से कहीं ज्यादा महेनत भी करनें लगा। अब तो उसे कोई भी दोस्त बुलाने आता तो वो उसे यही कहता था। कि भाई पहले तो मैं जैसे तैसे अकेला कमाकर खा लेता था।

मगर अब मेरी शादी हो गई तो मुझे अपनी पत्नी के लिए भी कमाना पड़ता हैं। और कल को आनेवाले बच्चों के लिए भी तो कुछ जोड़ना ही पड़ेगा। इसलिए दोस्त अब मैं तेरे साथ नहीं घूम सकता। ये कहकर उसका गवार लड़का सीधा अपनें काम पर निकल जाता हैं।

अब उसके दोनों भाई डॉक्टर और इंजीनियर आपस में ये बात करतें हैं। कि हम दोनों तो उस गवार से कहीं ज्यादा पैसे कमातें हैं। इसलिए हम सब घर और जमीन का बटवारा कर लेते हैं।

और उस गवार से अलग हो जातें हैं। क्योंकि अब वो हमारे बराबर कभी भी नहीं कमा सकता। इसलिए उन दोनों भाइयों ने अपनी माँ के लाख मना करने के बावजूद भी बटवारे की तारीख तय कर दी।

और उन्होंने अपनी बहन को भी बुलवा लिया। और अपनें गवार भाई से भी कह दिया कि आज तुम अपनें काम पर मत जाना क्योंकि हम सब आज घर और ज़मीन का बटवारा करेंगे।

उसी वक़्त उसकी बहन भी आ जाती हैं। तभी उसका गवार भाई कहता हैं। कि तुम लोग बटवारा कर लो मुझे जो भी देना हो दे देना मैं शाम को आकर अंगूठा लगा दूंगा तभी उसकी बहन कहती हैं।

अरे बेवकूफ तू तो अनपढ़ ही रहेगा। जमीन का हिस्सा तो आमने सामने बैठकर ही होता हैं। तभी उसके दोनों भाई भी बीच वाले गवार भाई को उल्टा सीधा कहते हैं। तब उसकी माँ भी उसे कहती है कि बेटा आज तू काम पर मत जा बटवारा तेरे सामने ही होगा तो ही अच्छा हैं।

उसी वक़्त वकील भी आ जाता हैं। तभी वकील कहता है कि आपका सारा हिस्सा मिलाकर 20 बीघा जमीन हैं और आपका घर हैं। अब ये बताओं कि किसको कितना हिस्सा देना हैं। मैं उसी हिसाब से बटवारे के कागज़ बना दूंगा।

उसी वक़्त उनका गवार भाई कहता हैं। कि वकील साहब 10-10 बीघा मेरे दोनों भाइयों के नाम लिख दो और ये जो हमारा मकान हैं। ये मेरी प्यारी बहन के नाम कर दो।

तभी उसके दोनों भाई और बहन पूछते हैं। कि और तू हिस्से में क्या लेगा। तभी उनका गवार भाई कहता हैं कि मेरे हिस्से में मेरी प्यारी माँ हैं न। और तभी वो अपनी पत्नी की तरफ मुस्कुराते हुए कहता हैं। कि क्यों मेरी प्यारी पत्नी क्या मैनें गलत कहा क्या?

उस गवार की पत्नी अपनी सास से लिपटकर कहती हैं। कि माँ से बड़ी वसीयत क्या होगी। मेरे लिए। उसी वक़्त उसका गवार पति भी अपनी माँ से लिपट जाता हैं। गवार बेटे बहुँ के इसी प्यार ने जमीन जायदाद के बटवारे को एक सन्नाटे में बदल दिया।

तभी बहन अपनें गवार भाई के गले लगकर रोते हुए कहती हैं। कि माफ़ कर दो भईया मैं आपको समझ नहीं सकी। तभी उसका भाई कहता हैं कि मेरी प्यारी बहन इस में इस घर में जितना अधिकार हमारा हैं उतना ही अधिकार तेरा भी हैं।

और रही बात बटवारे  की तो बटवारा नहीं करने से हमारा जीवन रुक तो नहीं जाएगा। क्यों करते हैं हम बटवारा क्या हम एक साथ मिलकर नहीं रह सकतें। जैसे हम बचपन में मिलकर रहते थें।

एक साथ मिलकर रहनें को ही तो कहतें हैं एक अच्छा परिवार और उस अच्छे परिवार को संभालती है एक "माँ" तभी उसके दोनों भाई भी बहुत शर्मिंदा होते हैं। और वो बटवारे के सभी कागज़ फाड़कर फेंक देते हैं।

और उस दिन के बाद से ही उनका पूरा परिवार खुशी खुशी एक साथ ही रहने लगा।


तो दोस्तों ये थीं "परिवार और माँ" एक सच्ची कहानी।



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13 साल बाद हुआ था लड़का

अक्टूबर 26, 2020 0
13 साल बाद हुआ था लड़का
एक पति पत्नी के 13 साल बाद लड़का हुआ था।

पति पत्नी को आपस में बहुत ज्यादा प्रेम था।

और जब इतनें साल बाद उनको लड़का हुआ तो उनका प्यार आपस में और भी ज्यादा बढ़ गया था।


और वो दोनों ही अपनें लड़के से बेहद प्यार करतें थें।

एक दिन सुबह जब उनका लड़का तक़रीबन 3 साल का हो गया था।

पति नें एक दवाई खुली हुईं देखी और उसे काम पर जानें के लिए बहुत देरी हो रहीं थीं।

इसलिए उसनें अपनी पत्नी से उसे बोतल को ढ़क्कन लगानें और अलमारी में रखनें को कह कर चला गया।

लेकिन उसकी पत्नी तो रसोई में काम कर रही थीं।

इसलिए वो अपनें पति की कहीं हुई बात पूरी तरह भूल गयी थीं।

तभी उनके 3 साल के बेटे नें वो दवाई की बोतल देखी और खेलने के इरादे से उस बोतल की और गया।


बोतल के कलर नें उसे मोह लिया था।

इसलिए उस 3 साल के बच्चे नें दवाई की पूरी शीशी ही पी ली।

उस दवाई की छोटे बच्चों को छोटी सी मात्रा भी ज़हरीली हो सकती थीं।

और दवाई पीने के बाद जब वह लड़का नीचे गिर गया।

तब उस लड़के की माँ उसे जल्द से जल्द हॉस्पिटल ले गयी।

जहाँ पर उसकी मौत हो गयी।

लड़के की अचानक मौत से उसकी माँ को बहुत ज्यादा सदमा लगा।

और वो ये सुनकर फुट फुट कर रोने लगी।

कि काश मैंने वो दवाई की शीशी का ढ़क्कन बंद कर दिया होता तो आज मेरा लाल जिंदा होता।

और वो ये सोचकर बहुत डर रही थीं।

कि वो अपनें पति को क्या जवाब देगी।

और जब उसका पति हॉस्पिटल में आया।

तो उन्होंने अपनें प्यारे बेटे को मृत पाया।

और अपनी पत्नी की और देखते हुए उसे अपने सीने से लगा लिया।

तभी उसकी पत्नी अपनें पति से रोती हुई माफ़ी माँगती है।

और ये कहती हैं कि मेरी गलतीं कि वजह से ही आज हमने 13 साल बाद हुए अपने प्यारे बेटे को खो दिया।

तभी उसका पति अपनी पत्नी से कहता हैं।

कि इसमें तुम्हारी कोई भी गलतीं नहीं हैं।

सारी गलतीं मेरी हीं हैं।

अगर मैंने खुद ही उस दवाई का ढक्कन बंद करके रख दिया होता तो आज हमारे लिए इतना बुरा दिन कभी भी नहीं आता।

लेकिन मैं अपना काम तुम्हें सोप कर अपने ऑफिस चला गया था।

इसलिए ये सब मेरी ही वजह से हुआ हैं।

तो दोस्तों गलतीं असल में उसके पति की थीं।

उसे ये समझना चाहिए था।

कि वो दवाई की शीशी उसके 3 साल बेटे के लिए कितनी खतरनाक हो सकती थीं।

मगर वो ख़ुद ही लापरवाह होकर शीशी का ढ़क्कन बंद करनें के लिए अपनीं पत्नी को कहकर चला गया।

और इसी गलतीं के कारण उन्होंने अपने इकलौते बेटे को खो दिया।

मगर दोस्तो उसके पति ने अपनीं गलतीं मान ली थीं।

वरना आजकल अपनी गलतीं को कोई भी नहीं मानता।

और अपनी सारी गलतीं वो दूसरों पर थोप देते हैं।

इसी वजह से कई दिक्कत खड़ी हो जाती हैं।

तो दोस्तों मैं आशा करती हूँ कि आपको इस कहानी से बहुत प्रेरणा मिली होगी।




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