मिशन पासिंग मार्क्स: कॉलेज के 4 दोस्तों की एग्जाम वाली रात की 'महाभारत'
कहा जाता है कि दुनिया के इतिहास में तीन युद्ध सबसे भयानक रहे हैं— प्रथम विश्व युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध और तीसरा...कॉलेज एग्जाम की आखिरी रात का ग्रुप स्टडी ऑपरेशन!
यह कहानी है चार पक्के लंगोटिया यारों की:
- कबीर (दुनिया का सबसे आलसी इंजीनियर): जिसका एक ही मंत्र था— "डिग्री तो सिर्फ एक कागज का टुकड़ा है, असली ज्ञान तो चाय की टपरी पर मिलता है।"
- जय (चाय कमांडो): इसे पढ़ने बैठते ही हर 15 मिनट में चाय की याद सताने लगती थी।
- मितेश (रट्टा किंग): कॉन्सेप्ट समझ आए या न आए, यह पूरी किताब ऐसे चाट जाता था जैसे कोई नया रैप सॉन्ग हो।.
- आरव (ऑफिशियल टॉपर): जिसके पास रंग-बिरंगे नोट्स थे, लेकिन एग्जाम की सुबह यही कहता था— "भाई, कसम से मैंने कुछ नहीं पढ़ा!"
सेमेस्टर के फाइनल एग्जाम में सिर्फ 12 घंटे बचे थे और कबीर के रूम पर 'मिशन पासिंग मार्क्स' का शिलान्यास हुआ।
रात 9:00 बजे - महामुहूर्त और पिज्जा पॉलिटिक्स
रात 9:00 बजे - महामुहूर्त और पिज्जा पॉलिटिक्स
चारों दोस्त किताबें खोलकर बैठ गए।
आरव ने गंभीर होकर कहा, "देखो भाई, आज रात हमें 5 चैप्टर पूरे करने हैं, कोई टाइमपास नहीं करेगा!"
कबीर ने एक लंबी उबासी लेते हुए कहा, "बात तो सही है भाई, लेकिन खाली पेट तो मां सरस्वती भी प्रसन्न नहीं होतीं। पहले कुछ ऑर्डर कर लें?"
अगला आधा घंटा इस गंभीर चर्चा में बीता कि कौन सा पिज्जा मंगवाना है। पढ़ाई अभी भी 0% पर थी।
रात 11:30 बजे - चाय ब्रेक और डीप फिलॉसॉफी
पिज्जा खाने के बाद मितेश ने किताब पकड़ी और किसी रोबोट की तरह रटना शुरू कर दिया।
तभी जय उठ खड़ा हुआ, "भाइयों, आंखें बंद हो रही हैं। अगर इस वक्त चाय नहीं पी, तो देश एक महान भविष्य का इंजीनियर खो देगा।"
वे सब चाय पीने नीचे चले गए। वहां चाय की चुस्की लेते हुए कबीर ने अचानक आसमान की तरफ देखते हुए पूछा, "यार, तुम्हें क्या लगता है? अगर हम कॉलेज ड्रॉपआउट कर दें, तो क्या एलोन मस्क हमें अपनी कंपनी में रखेगा?" इसके बाद अगले 2 घंटे पढ़ाई छोड़ स्पेस-एक्स और मंगल ग्रह पर जीवन की संभावनाओं पर बहस चलती रही!
रात 2:00 बजे - पैनिक अटैक (असली डर)
रूम पर वापस लौटकर जब दीवार घड़ी पर नजर पड़ी, तो चारों के तोते उड़ गए। सुबह 8 बजे एग्जाम था!
अब असली कॉमेडी शुरू हुई। कबीर, जो अब तक आराम से लेटा हुआ था, आरव के पैरों में गिर गया— "भाई, तू ही मेरा भगवान है, प्लीज मुझे पास करवा दे!"
आरव ने शॉर्टकट में समझाना शुरू किया। लेकिन कबीर का दिमाग ठहरा पुराना 2G नेटवर्क; आरव बोलता था 'प्रोग्रामिंग' और कबीर को सुनाई देता था 'पानीपूरी'।
दूसरी तरफ, मितेश इतनी स्पीड में रट्टा मार रहा था कि उसके मुंह से लार टपकने लगी थी। जय ने किताब उल्टी पकड़ रखी थी और आइंस्टीन की तरह पोज देकर घूर रहा था।
सुबह 4:00 बजे - सामूहिक संन्यास
आखिरकार सब थक गए। कबीर ने किताब जोर से बंद की और बोला, "सुनो दोस्तों, एग्जाम में 5 सवाल आएंगे। अगर हम हर आंसर की शुरुआत 'जय गणेश' से करेंगे और बीच में किसी बॉलीवुड गाने के लिरिक्स लिख देंगे, तो प्रोफेसर इमोशनल होकर पास कर ही देगा।" इस क्रांतिकारी आइडिया के बाद चारों चादर तानकर सो गए!
एग्जाम हॉल का क्लाइमेक्स
सुबह 8:30 बजे क्लासरूम में प्रश्नपत्र हाथ में आया।
पहला सवाल देखते ही कबीर के दिमाग में बैकग्राउंड म्यूजिक बज उठा— "जग घूमिया थारे जैसा ना कोई..." क्योंकि सवाल किस सब्जेक्ट का था, यह कबीर को भी नहीं पता था!
कबीर ने क्लास की पहली बेंच पर बैठे आरव को देखा, जो सुपरफास्ट स्पीड में सप्लीमेंट्री कॉपियां भर रहा था। कबीर ने मन ही मन सोचा— "यही वो लोग हैं जो समाज में नफरत फैलाते हैं, रात को कह रहा था कुछ नहीं पढ़ा!"
पहला सवाल देखते ही कबीर के दिमाग में बैकग्राउंड म्यूजिक बज उठा— "जग घूमिया थारे जैसा ना कोई..." क्योंकि सवाल किस सब्जेक्ट का था, यह कबीर को भी नहीं पता था!
कबीर ने क्लास की पहली बेंच पर बैठे आरव को देखा, जो सुपरफास्ट स्पीड में सप्लीमेंट्री कॉपियां भर रहा था। कबीर ने मन ही मन सोचा— "यही वो लोग हैं जो समाज में नफरत फैलाते हैं, रात को कह रहा था कुछ नहीं पढ़ा!"
मितेश, जो सब कुछ रटकर आया था, पेपर देखते ही उसका 'फैक्ट्री रीसेट' हो गया। वह पेन की कैप चबाते हुए छत को ऐसे देख रहा था जैसे आंसर वहीं लिखे हों!
रिजल्ट का दिन (चमत्कार)
एक महीने बाद रिजल्ट का दिन आया।
आरव फर्स्ट क्लास पास हुआ (उम्मीद के मुताबिक)।
मितेश और जय किसी तरह बॉर्डर पर पासिंग मार्क्स लाकर बच गए।
और कबीर? कबीर को उस सब्जेक्ट में 'KT' (फेल) आ गई!
जब आरव ने पूछा, "भाई, तूने पेपर में क्या लिखा था?"
तो कबीर ने कॉलर ऊंचा करते हुए कहा, "यार, मैंने तो पूरा पेपर गणपति बाप्पा के भजनों से भर दिया था, लेकिन लगता है हमारा प्रोफेसर किसी दूसरे भगवान का भक्त निकला!"
Conclusion (निष्कर्ष)
कॉलेज लाइफ में चाहे जितने भी मार्क्स आएं, लेकिन एग्जाम की आखिरी रात की वो बकवास, चाय की चुस्कियां और पास होने के लिए की गई वो नौटंकी ही जिंदगी भर याद रह जाती है!
नीचे कमेंट बॉक्स में अपने उन 'नमूने' दोस्तों को टैग करें जो एग्जाम की रात पढ़ने के बजाय दुनिया भर की पंचायत करते हैं!
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