गुरुवार, 3 दिसंबर 2020
Love Story - तुम सिर्फ मेरी हो
रविवार, 25 अक्टूबर 2020
फेसबुक वाला प्यार
शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2020
पति और पत्नी ने क्या लिखा डायरी में?
राज और सुमन की शादी को 15 साल हो गए थें। और दोनों ही एक दूसरें से बेहद प्यार करतें थें। मगर हर पति पत्नी की तरह उन दोनों में भी थोड़ी बहुत नोक जोक चलती रहती थी। जिससे कई बार सुमन जूझला जाती थीं। और सुमन बात बात पर अपने पति राज की गलतियाँ निकालती रहती थी।
और
शायद थोड़ी बहुत लड़ाई से भी सुमन
बहुत परेशान हो जाती थी।
एक दिन सुमन अपनी शादी की सालगिरह पर
दो डायरी लेकर आई और उसने
एक डायरी अपने पति को देते हुए
कहा कि राज तुम्हें
मुझसें जितनी भी शिकायत हो
और मुझमें जितनी भी कमियाँ हें
तो वो सारी कमियाँ
तुम हमारी अगली सालगिरह तक इस डायरी
में लिख देना। और मुझे भी
तुमसे जितनी भी शिकायत होगी
वो सभी इस डायरी में
लिख दूंगी।
और
देखतें ही देखतें साल
बीत गया। और जेसे ही
उन दोनों की शादी की
सालगिरह का दिन आ
गया। तो सुमन नें
अपनी लिखी हुई डायरी अपने पति राज को दे दी।
और राज ने भी अपनी
पत्नि सुमन की सभी शिकायते
लिखकर उसे डायरी दे दी।
तभी
राज अपनी पत्नी सुमन की डायरी पढ़ना
शुरू करता हैं। उसकी पत्नी सुमन की डायरी में
लिखा था।
तुमने
पिछलें साल मझें अपने मम्मी डैडी के जन्मदिन पर
जाने नहीं दिया। और इस करवा
चौथ पर तुमने मुजे
शौपिंग भी नहीं करवाई।
और हनीमून पर शिमला जाएंगे
कहते कहते तुम्हें 10 साल हो गए मगर
अभी तक शिमला लेकर
नहीं गए।
और
तुम पिछले रविवार को मेरे साथ
बाजार गए थें। तो
बाज़ार से आते वक़्त
मूझें गोलगप्पे खाने थें मगर तुमने यह कहकर मूझें
गोलगप्पे खाने ही नहीं दिए
कि सुमन जानू बाहर की चीजें कभी
भी नहीं खानी चाहिए। और मूझें बिना
गोलगप्पे खिलाएं ही घर वापस
ले आए।
और
फिर जब मैं ज्यादा
नाराज हो गयी। तो
फिर तुम खुद जाकर रात को बाजर से
गोलगप्पे ख़रीदकर लेकर आए। आप मेरी हर
ख्वाहिश पूरी जरूर करते हो। बस पहले मुझे
बहुत नाराज कर देते हो।
उसके बाद ही मेरी बात
मानतें हो।
ये
आदत आपकी बहुत गंदी हे। एसी ही न जाने
कितनी ही शिकायतों से
डायरी के 10-12 पेज भरें हुए थें। उन सभी शिकायतों
को पढ़ता रहा और उन्हें पढ़कर
खूब हँसता रहा। मानो जैसे वो अपनी पत्नी
से बिल्कुल भी खफा नहीं
था।
अब
राज की डायरी उसकी
पत्नी सुमन पढ़ती हैं।
और
जैसे ही सुमन अपनेे
पति राज की डायरी को
खोलकर पढ़ने लगती है। तो उसकी पत्नी
ने क्या देखा कि डायरी तो
पूरी खाली थी। और उसमें कुछ
भी नहीं लिखा हुआ था। तो सुमन अपने
पति से बहुत गुस्सा
होकर बोली। कि राज तुमने
मेरी दी हुई डायरी
में कुछ भी नहीं लिखा।
और
तुमने मेरी एक बात भी
नहीं मानी। तभी राज ने डायरी का
आखिरी पेज खोलकर अपनी पत्नी के सामने रख
दिया। और उस पेज
पर कुछ लिखा हुआ था। जिसे पढ़कर ही सुमन की
आँखों से आँसू बहने
लगें। डायरी के आखिरी पेज
पर लिखा था।
कि सुमन तुम्हारें अंदर कुछ कमियों जरूर हे। मगर तुम्हारी अच्छाइयों को में इस डायरी में लिखूँगा तो शायद ये डायरी भी कम पड़ जाएगी। क्योंकि तुम अपने माता पिता को छोड़कर आई और यहाँ मेरे माता पिता को अपने माता पिता जेसा प्यार दिया। और उनको सम्मान दिया और मेरे बुरे वक़्त में तुमने मेरा कितना साथ दिया।
और
जीवन में तुमनें मेरा कितना हौसला भी बढ़ाया। और
जीवन में आने वाली सभी दुःख तकलीफ़ में तुमने कभी मेरा साथ नहीं छोड़ा। हर साल तुम
मेरी लंबी उम्र के लिए करवाचौथ
का व्रत भी रखती हो।
और हाँ ऑफिस जाते वक़्त मुझे जो भी चीज
चाहिए वो तुम मेरे
ऑफिस जाने से पहले ही
मेरे लिए तैयार रखती हो।
और
तुम मुझसें इतना सारा प्यार भी तो करतीं
हो। और ऐसी बहुत
सारी तुम्हारे अंदर अच्छाइयों हे। सुमन की मैं इस
डायरी मे क्या क्या
लिखूँ बस मैं इस
डायरी में इतना ही लिखूँगा की
हर जन्म में तुम मेरी ही जीवन साथी
बनना सुमन "तुम्हारा राज"
डायरी
पढ़ते पढ़ते सुमन बहुत रोने लगी। रोते हुए वो अपने पति
की बाहों में लिपट गयी। और कहने लगी
कि राज मे भी कितनी
पागल हूं ना। कि मैने जरा
सी बात का इतना बड़ा
पतंगड बना दिया। तभी उसका पति कहता हैं कि सुमन छोटी
मोटी लड़ाइयाँ तो पति पत्नी
के बीच होती ही रहतीं है।
इसका मतलब ये नहीं कि उनका प्यार कभी भी कम हो जाये। और सुमन तुम कभी भी ये मत सोचना कि तुम्हारें लिए मेरा प्यार कभी कम हो जायेगा। हमारे बीच चाहें जितने भी जगडे हो जाए। मैं तुम्हें हमेशा चाहता रहूँगा। ये बात सुनतें ही सुमन के मन में अपने पति के लिए और भी इज्जत बड़ गयी।
तो दोस्तों पति पत्नी के बीच थोड़ी बहुत लड़ाईयां तो होती ही रहती है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि इससे आपका प्यार कभी भी कम हो जाए। तो अपने प्यार को हमेशा बरकरार रखो और हमेशा खुश रहो।गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020
सच्चा प्यार हो तो ऐसा
राकेश
और स्वेता एक दूसरें से
बेहद प्यार करते थे वो दोनों
एक ही कॉलेज में
एक साथ ही पढ़ाई कर
रहे थे और दोनों
का अब कॉलेज में
एक साथ पढ़ाई का आखिरी ही
साल बचा हुआ था।
एक
दिन स्वेता और राकेश एक
पार्क में धुमनें के लिए गए
तब स्वेता नें राकेश से पूछा की
राकेश तुम मुझसें कितना प्यार करतें हों और तुम मुझसें
शादी करोगें या बस यूं
ही प्यार करके छोड़ दोगें।
और मैं मन ही मन तुम्हें अपना सब कुछ मान चुकीं हूं और अगर तुमने मुझे कभी "छोड" भी दिया तो भी मैं तुम्हे भूल नही पाऊंगी ये कहते ही स्वेता की आँखों मे आंसू आ गए "स्वेता को इस तरह रोतें देख" राकेश ने सबसे पहेले उसके आँसू पोछे और फिर स्वेता को अपनी बाँहो में ले लिया और फिर उससे ये कहा कि पगली मैंने तुम्हें "छोड़ने के लिए" थोड़ी प्यार किया है।हमारा प्यार तो सात जन्मों तक रहेगा।
राकेश आज तो तमने मुजे सरप्राइज ही कर दिया तुम जल्दी आ जाओ और मैं जल्दी ही तैयार हो जाती हूं। तो करीब एक घंटे में ही राकेश और उसके माता पिता स्वेता के घर पर पहुंच जाते हैं।
लेकिन जब राकेश स्वेता के घर पहुँचता हैं तो वो क्या देखता हैं कि स्वेता का तो इतना बड़ा घर था और वह मन ही मन ये सोचता है कि शायद स्वेता के पिताजी बहोत ही अमीर हैं।
लेकिन हमारा परिवार तो इनके आगे कुछ भी नहीं तभी राकेश नें स्वेता के घर की बैल बजाई बैल बजते ही स्वेता समझ जाती हैं कि राकेश आ गया और वो अपनें नौकर को मना कहकर खुद ही दरवाजा खोलने चली जाती हैं।
और
राकेश व उसके परिवार
का स्वागत करतीं हैं और उन्हें अंदर
लेकर जाती हैं।
अंदर जातें ही राकेश के माता पिता इतने बड़े घर को देखकर ये सोचतें हैं कि पता नहीं स्वेता के पिताजी ये रिश्ता करेंगे या नही।
तभी अचानक स्वेता के पिता भी आ जाते हैं और सभी के लिए नाश्ता पानी मँगवाते हैं। तो तभी राकेश के पिताजी ने राकेश के लिए स्वेता के पिताजी से स्वेता का हाथ मांग लिया।
तो स्वेता के पिताजी ने राकेश से पूछा कि बेटा तुम काम क्या करतें हों तब राकेश नें बड़ी ही प्यार से कहा कि अंकल जी मैंने रेलवे में बड़ी पोस्ट पर फॉर्म भर रखा हैं और मैंने उसके पेपर भी दे दिए हैं।
और बस अब रिजल्ट आना ही बाकी हैं। तभी स्वेता के पिताजी ने फिर ये पूछा कि उस रेलवे की पोस्ट पर तुम्हारी सैलरी कितनी होगी तो राकेश ने कहा कि अंकल जी यही कोई 35,000 के आसपास होगी।
ये सुनतें ही स्वेता के पिताजी ने राकेश से बहुत ही गुस्से में कहा कि तुम्हें पता हैं कि 35,000 तो मेरी बेटी 5 दिन में खर्च कर देती हैं और तुम्हें शायद ये भी नहीं पता होगा कि मेरी बेटी स्वेता हर हफ़्ते 7 से 10 हजार की तो बाहर शॉपिंग करके ही खर्च कर देती हैं।
ये सुनतें ही राकेश के पिताजी ने भी गुस्से में स्वेता के पिताजी से ये कह दिया कि शायद आपको इस धन दौलत पर बहुत ही ज्यादा घमंड हैं।
रखिये अपनी घन दौलत अपने पास और अपनी बेटी की शादी किसी करोड़पति लड़के से करवाना तभी वो अपने बेटे राकेश का हाथ पकड़ कर ये कहते हैं कि चलों बेटा हम तेरा रिश्ता कहीं और करवा देंगे।
तभी राकेश स्वेता के पिताजी के आगे हाथ जोडक़र ये कहता कि अंकल जी मैं आपकी बेटी से बेहद प्यार करता हूं और स्वेता भी मुझसे बहुत प्यार करती हैं।
तो प्लीज़ इस रिश्ते के लिए आप मान जाइये और आपसे मै वादा करता हूं कि मैं आपकी बेटी को जरा भी दुखी नहीं रखूँगा। ये सुनते ही स्वेता की भी आंखों में आंसू आ जाते हैं।
और वो भी अपने पिताजी से कहती हैं कि पिताजी में भी राकेश से बेहद प्यार करती हूं और में उसके बिना किसी ओर से कभी भी शादी नही कर पाउंगी। बेटी की ये बात सुनकर उसके पिताजी ने उसको एक थप्पड़ मार दिया।
तभी स्वेता रोती हुई अपने कमरें में चली गयी और स्वेता के पिताजी ने गुस्से में अपने नौकर से कहा कि इन लोगो को यहाँ से बाहर निकाल दो ये सुनते ही राकेश और उकसे माता पिता बड़े ही निराश होकर स्वेता के घर से चलें गए।
और जल्द ही स्वेता के पिताजी नें स्वेता कि एक बड़े घर में शादी तय कर दी और उन्होंने उसकी जबरदस्ती ही एक महीने के अंदर सगाई भी करवा दी।
उधर राकेश की रेलवे में नौकरी भी लग चुकी थीं। तब एक दिन अचानक स्वेता ने राकेश को फ़ोन करके ये कहा कि राकेश तुम कहाँ चले गए थें। मैंने कितनी बार तुम्हारा नंबर मिलाया लेकिन तुम्हारा नंबर बंद जा रहा था।
और स्वेता अगर हमने घर से भागकर शादी कर भी ली तो तुम्हें पता हैं जीवन के आने वाले वक़्त में हमारे बच्चें भी ऐसा ही करेंगे और फिर हमें भी शर्मिंदा होना पड़ेगा।
इसलिए स्वेता हमें हमारे प्यार पर पूरा विश्वाश रखना चाहिए और उस भगवान पर भी जिसनें हम दोनों को सच्चा प्यार करवाया। अब बस तुम वैसे ही करो जैसा तुम्हारें घरवाले तुमसे कह रहे हैं।
और नीचे गिरकर वो बेहोश हो गयी और स्वेता के सिर और पैर में बहुत ज्यादा चोट लग गयी थी। और शायद उसके पैर की हड्डी भी टूट गयी थीं। तभी स्वेता के पिताजी ने फटाफट एक एम्बुलेंस बुलवाई और जल्दी से वो उसे हॉस्पिटल लेकर गए।
उस वक़्त मैं अपनी धन दौलत में अंधा हो चुका था। तभी राकेश के पिताजी ये कहते है कि आप ये माफी वाफ़ी छोड़िए। और राकेश ओर स्वेता की शादी की तैयारिया कीजिये।
लेकिन स्वेता के तो पैर में चोट लगी हुई थीं। तो शादी में फेरे कैसे हो पातें। तभी राकेश ने स्वेता को अपनी गोद में उठा लिया।
तो दोस्तो इस कहानी में स्वेता के पिताजी को भी सबक मिल गया और राकेश व स्वेता का भी प्यार मिल गया।
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