SB Entertainment Blogs: Love Story
Love Story लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Love Story लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 3 दिसंबर 2020

Love Story - तुम सिर्फ मेरी हो

दिसंबर 03, 2020 0
Love Story - तुम सिर्फ मेरी हो
तुम सिर्फ मेरी हो

देव को अभी अभी कुछ ही दिनों पहलें अपनी प्रेमिका से प्यार में धोका मिला था और उस्नें एक अमीर लडके से शादी के लिए हाँ भी कर दिया था। तो देव बहुत ही उदास होकर शाम के समय समुद्र के किनारे बैठा हुआ वो अपनी गर्लफ्रेंड की फोटो को अपने सीने से लगाकर उसे बहुत ही मिस कर रहा था। तभी उसको पीछे से एक चिल्लाने की आवाज़ आयी, तो देव ने जब पीछे मुड़कर देखा तो एक लड़की को कोई लड़का छेड़ रहा था। लेकिन देव ने उसको देखकर अनदेखा कर दिया। क्योंकि वो पहले से ही बहुत परेशान था। और वो ये समझ रहा था कि शायद इस लड़की का भी कोई प्यार का ही चक्कर होगा इसलिए देव ने उनके बीच में बोलना सही नहीं समझा, लेकिन ये क्या हुआ अचानक ही उस लड़के ने उस लड़की को एक थप्पड़ मार दिया और जैसे ही वो लड़की ज़मीन पर गिरने वाली थी, वैसे ही देव जल्दी से खड़ा होकर उस लडकी को संभाल लेता हैं। और जब देव ने उस लड़की का चेहरा देखा तो उस लड़की के होठों से खून निकल रहा था और वो देव से बार बार ये भी कह रही थी की प्लीज़ मुझे इस लडके से बचा लो, मैं इस लड़के को बिलकुल भी नहीं जानती।

इतना सुनते ही देव ने उस लड़के की गिरेबान पकड़ ली और उससे वहां से जाने के लिए कहा तो उस लड़के ने देव से कहां की अगर मैं नहीं गया तो तू क्या कर लेगा। तभी देव ने उसको एक पटकी में ही धूल चटा दी की वो भागता हुआ ही नजर आया। तो देव ने उस लड़की से पूछा कि तुम ठीक तो हो ना और तुम कौन हो और कहा से आई हो तो उस लड़की ने कहा कि मेरा नाम पायल है। और में अपने गांव से भाग कर आई हूं, क्योंकि मेरे चाचा चाची मेरी शादी बहुत ही गंदे आदमी के साथ करवा रहें थें। और मुझे वह लड़का बिल्कुल भी पसंद नहीं हैं। तभी देव ने पूछा कि तुम्हारे माता पिता कहा है इस बात पर पायल रोने लग जाती हैं और रोते हुए देव से कहती हैं, की अब मेरे माता पिता इस दुनियां में नहीं रहें। और इतने दिनों से में अपने चाचा चाची के पास ही रहती थीं लेकिन वो लोग बिल्कुल भी अच्छे नहीं हैं और उन्होंने हमारी पूरी जमीन भी अपने ही नाम करवा ली और तो और मेरे चाचा चाची ने एक बहुत गंदे लड़के से मेरी शादी करवाने के लिए बहुत सारे पैसे भी ले लिए।इसलिए मुझे अपने गांव से भागकर दिल्ली शहर में अपनी एक सहेली की दोस्त के पास आना पड़ा लेकिन आज सुबह उसके माता पिता ने भी मुझे जाने के लिए कह दिया और अब मुझे समझ नही आ रहा की अब में जाऊं तो जाऊं कहां, ये कहकर पायल वही बैठकर रोने लग जाती हैं तभी अचानक देव के हाथों में से उसकी प्रेमिका की फोटो उड़कर समुद्र में ही बह जाती हैं। और फोटो को ढूंढने के लिए देव समुद्र की लहरों में ही कूद गया। देव की ऐसी हरकत देख पायल उसका हाथ पकड़कर अपनी और खेचतीं हैं लेकिन देव उस पर चिल्लाता हुआ कहता हैं।

की तुम दूर हो जाओ मुझसे तुम्हारी ही वजह से मेरी प्रेमिका की फोटो इस समुद्र में बह गई लेकिन अब क्या था। फोटो तो दूर तक बह चुकी थीं और देव खाली हाथ घुटनों के बल समुद्र की लहरों में ही बैठ गया था। उसे उदास देखकर पायल ने सोचा कि उसे वहां से चले जाना चाहिए क्योंकि शायद ये सब कुछ उसी की ही वजह से हुआ हैं, और ये सोचकर पायल वहां से चली गई। तभी थोड़ी देर में देव पानी में से खड़ा होता हैं और पीछे की तरफ मुड़ता है तो वो देखता है की वो पायल नाम कि लड़की कहां चली गई और वैसे भी चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था ये देखकर देव सोचता हैं की वो गाँव से आई लड़की इतनी रात को कहां जाएगी। तो देव उसी वक्त उसे ढूंढता हुआ आगे की तरफ चला जाता हैं।

और थोड़ी ही दूरी देव को वो लड़की मिल जाती है तभी देव उससे कहता हैं की पायल अगर तुम बुरा न मानों तो प्लीज़ मेरे घर चलो और तुम जब तक चाहो वहां पर रह सकती हो। तो पायल कहती हैं की नहीं, लगता हैं आप पहले ही बहुत ज्यादा परेशान हैं। इसलिए में आपको और परेशान नहीं कर सकती। तो देव ने कहा अरे नहीं मेरी परेशानी ज्यादा बड़ी नहीं हैं। मुझे तो बस मेरी प्रेमिका ने धोखा दिया हैं और वैसे भी अच्छा हुआ क्योंकि वो लड़की पैसों पर बहुत मरती थीं। मगर आपकी परेशानी मुझसे कहीं ज्यादा बड़ी हैं। और इस समय आपके माता पिता भी आपके साथ नहीं हैं और आपके चाचा चाची ने भी तो आपको धोखा दिया हैं। लेकिन तुम अब चिंता मत करो मेरे घर में मेरी माँ और मेरी बहन हैं वो तुम्हारा बहुत ध्यान रखेगी और बाकी सब मै संभाल लूंगा। तभी पायल देव की आंखों में देखती हैं और कहती है कि आप कितने अच्छे है। आप अपना इतना बड़ा दुःख छुपाकर मेरी सहायता कर रहे हैं।

लेकिन मेरी दिल से दुआ हैं की आपको आपकी प्रेमिका से भी अच्छी लड़की जरूर मिलेगी। इतना सुनते ही देव की आंखों में दर्द वाले आंसू आ जाते हैं। और वो अपने आंसू ओ को छुपाते हुए पायल को अपने घर चलने को कहता हैं। तो पायल देव के घर पहुंच जाती हैं तभी देव की माँ पूछती है, की देव ये कौन हैं ? तो देव पायल की सारी बात अपनी माँ को बता देता हैं। सारी बात सुनते ही देव की माँ की आंखे भी नम हो जाती हैं। और पायल भी रोने लगे जाती हैं तभी देव की माँ पायल को अपने सीने से लगाकर कहती हैं, की पायल बेटी तुम चिंता मत करो अब तुम्हारी शादी की सारी जिम्मेदारी मेरी हैं। तभी अचानक देव की बहन मुस्कुराती हुई ये कह देती हैं की माँ क्यों न हम पायल की शादी देव भइया से करवा दे, वैसे भी भइया की गर्लफ्रेंड ने उसे इतना बड़ा धोखा दे दिया इतना सुनते ही देव अपने कमरे में चला जाता हैं। 

तभी देव की माँ पायल से कहती हैं की पायल बेटी मेरी बेटी की बात का जरा भी बुरा मत मानना ये दिल की बहुत साफ हैं और इसके मुंह में जो बात आती हैं वो ये फटाकसे कह देती हैं। तो पायल ने कहा कि नहि आंटी जी मुझे बिल्कुल भी बुरा नहीं लगा। तभी पायल को देव के घर में रहते हुए एक महीने से भी ऊपर हो गया और पायल उनके घर में एक दम घुल मिल गई थी वैसे देव के पास एक कार थी और उसने अपनी कार को टैक्सी बना रखी थी। तभी एक दिन पायल ने राधे की माँ से कहा कि आंटी जी मै आज तक कभी दिल्ही नहीं घूमी इसलिए आप देव जी से कहिए ना की वो मुझे दिल्ही घुमाकर लाए, तो देव की माँ ने अपने बेटे को आवाज दी तो देव अपने कमरे से बाहर आकर कहता हैं, हाँ कहो माँ। तो उसकी माँ ने कहा कि, देव आज तू पायल को पूरा दिल्ही घुमाकर लाएगा तो देव ने कहा कि माँ मेरे पास बिल्कुल भी वक्त नहीं हैं इस समय काम भी ज्यादा हैं। लेकिन उसकी माँ नहीं मानी और उससे दुबारा कहा कि नहीं तू आज सारे काम छोड़ और पायल को घुमाकर ला। तभी पायल ने कहा कि आंटी जी कोई बात नहीं अगर देव जी के पास आज समय नहीं हैं तो में फिर किसी और दिन इसके साथ घूम लुंगी। इतना कहकर पायल थोड़ी उदास हो जाती हैं। तब देव ने जब पायल का चेहरा देखा तो उसका चेहरा बहुत उदास था। तभी वो अपनी माँ से कहता हैं की माँ ठीक हैं में आज छुट्टी करके पायल को दिल्ली घुमा लाऊंगा। इतना सुनते ही सपना खूशी से उछल पड़ती हैं और देव की माँ से सीने से लिपट जाती हैं।  और कुछ ही देर में वो दोनों दिल्ही घूमने निकल जाते हैं।

तभी देव पायल को दिल्ही घुमाने ले जाता हैं। तो देव की कार में पीछे ना बैठकर पायल उसकी बगल वाली सीट पर ही बैठ जाती हैं। लेकिन ये क्या पायल देव पर थोड़ा गुस्सा होकर कहती हैं, की देव जी क्या मै पागल हूं जो की तुमसे यूँ ही बक बक कर रही हूं तुम कुछ तो बोलो यार। ये सुनते ही देव कहता हैं की पायल तुम्हे क्या हो गया । क्या मैंने सही सुना की तुमनें मुझे यार कहकर पुकारा, तो पायल थोड़ा सा अटकते हुए बोली की नहीं में तुम्हे यार क्यों बोलूंगी। तभी पायल अपने मन से बात करती हुईं बोलती हैं, अरे पायल ये तो बहुत ही बोरिंग हैं लगता हैं आज तो तू पूरी ही बोर हो जाएगी। हे भगवान प्लीज़ कुछ करो, तभी देव कहता हैं अब इसमें भगवान कहा से बीच में आ गया ये कहकर देव थोड़ा मुस्कुरा देता हैं। तो पायल ने पूछा, क्या तुमने कुछ सुना क्या ? तो देव ने कहा कि, तुम अगर अपने मन में भी इतना जोर से बोलोगी तो कोई भी सुन लेगा।

इस बात पर दोनों ही हँसने लग जाते है ओर इस तरह दोनों ही एक दूसरे से सवाल करते हैं तभी देव ने पायल से पूछा कि अच्छा पायल क्या तुमने कभी किसी से प्यार किया है। तो पायल ने कहा कि हां देव जी मैं अपने माता-पिता से बहुत प्यार करती हूं और हमेशा करती रहूंगी। तो देव ने कहा कि अरे नहीं मैं तो तुमसे यह पूछ रहा हूं कि तुमने कभी किसी लड़के से प्यार किया है। तो पायल का जवाब सुनकर देव भी हैरान हो गया। पायल ने कहा कि देव जी अगर आज तक मेरे मन में किसी भी लड़के के लिए थोड़ी सी भी इज्जत या सम्मान है तो वह आप हैं, देव जी क्योकिं आज मैं सुरक्षित हूँ तो वो हूँ आपकी वजह से, अगर आपने उस दिन मुजे उस लड़के से बचाया ना होता तो शायद आज में पता नहीं कहां होती या न जाने वह लड़का मेरे साथ क्या करता। लेकिन आपने तो मुझे उससे बचाया भी और अपने घर में मुजे रहने की जगह भी दी इसलिए मेरे लिए तो आप ही मेरे भगवान है। इतना कहकर सपना चुप हो जाती है।

तो राधे एक जगह पार्क के पास गाड़ी रोक देता है और पायल से कहता है, कि पायल चलो इस पार्क में चलते हैं। यह दिल्ली का सबसे बड़ा पार्क है, तो पायल खुश होकर गाड़ी से उतर जाती है और दोनों ही उस पार्क में चले जाते हैं। लेकिन ये क्या वहाँ तो चारों तरफ सिर्फ कपल्स ही बैठे हुए थें। तो पायल ने मुस्कुरातें हुए देव जी से पूछा की देव जी ये आप मुझे कहा लेकर आ गए। तो देव ने पायल से कहा कि पायल मुझे नहीं पता था कि यहाँ पर प्यार करने वाले ही आते हैं। तब पायल ने कहा कि चलो कोई बात नहीं हम थोड़ी देर यहाँ पर बैठकर फिर कहीं और चलेंगे और वह दोनों वहाँ पर बैठ गए। लेकिन वहाँ बैठना इतना आसान नहीं था। वहाँ सभी लड़के और लड़कियाँ एक दूसरे से किसिंग कर रहे थे। ये देखकर पायल देव का हाथ पकड़ लेती हैं। और मुस्कुरातें हुए कहती हैं कि देव जी शायद अब हमें यहाँ से चलना चाहिए। लेकिन देव को बड़ा ही अजीब सा ही लगा, क्योकि अभी तक पायल ने देव का हाथ पकड़ रखा था। और इस हरकत से देव का दिल जोर जोर से धड़क रहा था। लेकिन शायद कहीं न कहीं देव को अच्छा लग रहा था।

तो देव ने धीरे से पायल से कहा कि पायल प्लीज क्या तुम मेरा हाथ छोड़ दोगी तो पायल ने जल्दी से देव का हाथ छोड़ दिया और दोनों ही कहीं और घूमने चले गए। फिर देव पायल को दिल्ली में कई जगह घुमाने ले गया। और बाद में देव उसे एक बहुत बड़े मॉल में लेकर गया। जहाँ सपना ने बहुत सारी शॉपिंग भी करी लेकिन अचानक ही उस मॉल में पायल को उसका एक गाँव का आदमी सामने से आता हुआ नजर आया। तो जैसे ही वह आदमी उसे देखने वाला था वैसे ही पायल देव की बाहों में लिपट गई तो देव एकदम सन्न रह गया। और पायल से पूछा कि पायल यह तुम क्या कर रही हो। तो पायल ने धीरे से कहा कि देव जी मुझसे ऐसे ही चिपके रहे क्योंकि मेरे पीछे से मेरे गाँव का एक आदमी आ रहा है। और वह आदमी बहुत ही खतरनाक है तभी देव ने कहा कि तुम डरो मत पायल मैं हूं ना मेरे होते हुए कोई तुम्हें टच भी नहीं कर सकता। तो सपना ने कहा कि नहीं देव जी आपने वैसे ही मेरे लिए इतना कुछ किया है और मैं आपको और परेशान नहीं कर सकती। तो आप चुपचाप से चिपके रहिए। तभी थोड़ी देर में वह आदमी वहाँ से चला जाता है। और पायल देव से दूर हो जाती है। लेकिन देव को ना जाने क्या हो गया था वह तो जैसे पायल की बाँहो से निकलना ही नहीं चाहता था।

तभी देव और पायल बाहर आ जाते हैं। पायल को आइसक्रीम वाला नजर आ जाता है। तो अचानक चिल्ला पड़ती है देव उसे देख कर डर जाता है और पूछता है कि क्या हुआ तो पायल ने कहा कि देव जी मुझे आइसक्रीम खानी है प्लीज, तो देव उसके लिए एक आइसक्रीम लेकर आ गया और वह दोनों गाड़ी में बैठ गए तभी देव ने पायल को आइसक्रीम दे दी और गाड़ी को स्टार्ट कर दी, तो पायल ने कहा कि आप एक ही आइसक्रीम क्यों लाए हैं तो देव ने कहा कि नहीं मैं आइसक्रीम नहीं खाता तभी पायल ने कहा कि आप नहीं खाएंगे तो मैं भी नहीं खाऊंगी। तो देव ने फिर से कहा तुम खा लो पायल मैं नहीं खा पाऊंगा, लेकिन पायल ने तो जबरदस्ती देव के मुँह में आइसक्रीम डाल दी। लेकिन इस बात पर देव को बहुत बुरा लगा और उसने आइसक्रीम पकड़ कर बाहर फेेंक दी, तो पायल रोने लग गई तब देव ने गाड़ी चलाई और गाड़ी को समुद्र के पास ले गया और फिर वह बाहर निकल कर वहीं पानी की लहरों के पास बैठ गया। तो पायल भी उसके पास आ गई और उसने उसके कंधे पर हाथ रख कर कहा कि, मुझे माफ कर दो देव जी। लेकिन जब आपकी प्रेमिका ने आपको इतना बड़ा धोखा दे दिया तो आप उसे भूल क्यों नहीं जाते। आप तो इतने अच्छे हैं आपको तो कोई भी अच्छी लड़की मिल जाएगी। तभी देव खड़ा हो जाता है और अपने आँसुओं को पोछते हुए पायल से गुस्से में ये कहता हैं कि, मुझे किसी भी लड़की से प्यार नहीं करना हर लड़की सिर्फ पैसों पर ही मरती है तो पायलने कहा कि देव जी आपने तो हर लड़की को एक ही तराजू में तोल दिया। इसका मतलब आप मुझे भी ऐसे ही लड़की समझते होंगे, लेकिन इसमें आपकी कोई गलती नहीं है सारी गलती आपकी प्रेमिका की है जिसकी गलती की वजह से आपने हर लड़की को एक जैसा ही समझ लिया।

इस बात पर देव ने गुस्से गुस्से में पायल से कहा कि तुम्हे मेरी प्रेमिका के बारे में कुछ भी कहने की कोई भी जरूरत नहीं है। और प्लीज अभी तुम मुझे अकेला छोड़ कर घर चली जाओ वैसे भी घर यहाँ से ज्यादा दूर नहीं है। इतना कहकर देव वही पानी की लहरों के पास उदास होकर बैठ जाता है। और पायल भी आंखों में आंसू लिए घर की तरफ चली जाती है और थोड़ी देर में देव भी घर पहुँच जाता है देव के घर पहुँचते ही देव की माँ पूछती है कि बेटा पायल कहाँ पर रह गई। तो देव नें घभारतें हुए पूछा कि आपका क्या मतलब है माँ वह तो 1 घंटे पहले ही घर पर आ गई होगी तभी देव की माँ ने आंखों में आंसू लिए कहा कि बेटा तू जल्दी उसे ढूंढ वो अभी तक घर नहीं आई तो देव भागता हुआ वही समुद्र के पास गया। लेकिन वहाँ पर भी वो नहीं थी, फिर देव ने पायल को घर के आस-पास भी ढूंढ लिया मगर हो उसे कहीं पर भी नहीं मिली। अब देेेव बहुत ही दुखी हो रहा था और खाली हाथ ही वह घर चला गया। घर पर पहुंचते ही देव अपनी माँँ के आगे रोने लग गया और रोते हुए कहा कि माँ पायल कहीं नहीं मिली और यह सब मेरी वजह से हुआ है। तेरी वजह से वो कैसे ?

तो देव ने पायल ओर उसके बीच हुई सारी बात बता देता है और साथ में यह भी कहता है कि माँ न जाने मुझे पायल से कब प्यार हो गया। और आज वह भी मुझे छोड़ कर चली गई मेरा नसीब ही खराब है, माँ मैंने तो बस थोड़ा गुस्से में पायल को उल्टा सीधा कह दिया था। मुझे क्या पता था, कि इतनी सी बात पर वो मुझे छोड़कर चली जायेगी और आज के बाद माँ मैं किसी भी लड़की से कभी भी प्यार नहीं करूंगा। क्योंकि हर लड़की मुझे धोखा देकर चली जाती है। यह कहकर देव आँखों में आंसू लिए छत पर चला जाता है। और छत पर जाकर तारों से भरे आसमान के नीचे वह पायल को याद करता हुआ बहुत रोता है। तभी अचानक पीछे से पायल आ जाती है और उससे धीरे से आवाज मारती है देव जी, तभी देव उसे देख कर भाग कर उसकी बाँहो में लिपट जाता है। और उससे पूछता है कि तुम कहाँ चली गई थी पायल, तो पायल ने कहा कि देव जी मुझे तो आपसे तभी प्यार हो गया था, जब आपने मुझे उस गुंडे से बचा था। और यह बात मैंने आपकी बहन को भी बता दी थीं और मैं कहीं भी नहीं गई थी मैं तो घर में ही थी बस मैं तो यह जाना चाहती थी कि आप भी मुझसे प्यार करते हैं या नहीं। तो देव ने उससे कहा कि पायल मुझे तुमसे बेहद प्यार हो गया है तुम मुझे कभी छोड़कर मत जाना। तो पायल देव के सीने से लिपटकर कहती हैं कि अब तो मैं आपको मरने के बाद भी नहीं छोडूंगी। इतना सुनते ही देव पायल के होठों को चूमने लग जाता है और दोनों ही एक दूसरे के प्यार में पूरी तरह डूब जाते हैं और कुछ ही दिनों में दोनों की शादी भी हो जाती है।

रविवार, 25 अक्टूबर 2020

फेसबुक वाला प्यार

अक्टूबर 25, 2020 0
फेसबुक वाला प्यार
एक दिन एक लड़की के पास फेसबुक par एक लड़के की फ्रेंड रिक्वेस्ट आती हैं।

लड़के की पीक देख कर लड़की उसे रिजेक्ट कर देती हैं।


क्योंकि लड़के कि पीक उसे पसंद नहीं आती।

पर लड़का बार बार उसे रिक्वेस्ट सेंड करता हैं।

इस से तंग आकर लड़की उसे ऐड कर लेती हैं।

अब लड़का उसे कभी गुड मॉर्निंग या इवनिंग या खाना खाया? ये सब मेसेज करने लगा।

लड़की इग्नोर करती पर बार बार मेसेज करने पर वो रिप्लाई देने लगी।

धीरे धीरे दोनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए।

लड़के का नाम मौलिक था और वो शिप पर जॉब करता था।

अभी छुटियों पर घर आया था कुछ दिनों में उसे फिर से जॉब पर जाना था।

दिन बीतते गए और लडके के शिप पर जाने का दिन भी आ गया।

उसने जाने से पहले लड़की को कॉल किया और उस से पूछा?

की क्या वो उसे लव करती हैं? लड़की ये सुनकर चुप हो गई।

वो उसे प्यार तो करती थी पर अभी थोड़ा वक़्त और चाहती थी।

लड़की ने बोला कि मैं तुम्हें लाइक करतीं हूं अगर तुम्हारे जाने के बाद मुझे तुम्हारी याद आई तो मै वापस आने पर तुम्हें जवाब दे दूंगी।

लड़का चला गया।

पूरा 1 महीना गुजर गया मौलिक का कोई कॉल मेसेज नहीं आया।

लड़की को उसकी बहोत याद आती उसका बार बार मेसेज करना केअर करना सब उसे बहुत याद आने लगा।

लड़की बस उसके कॉल का इंतजार करती और सोचती की इस बार वो मौलिक को बोल देगी की वो उसे बहुत प्यार करती हैं।

उसे मौलिक के प्यार का एहसास हो गया था।


एक दिन बहार के नंबर से कॉल आने पर उसने जल्दी से कॉल उठाया।

एक लड़का बोला क्या आप स्वेता  बोल रही हैं।

में मौलिक का दोस्त बोल रहा हूं।

मौलिक का शिप कि शिडियो से पैर स्लिप हो गया।

जिस से उसके सर पर गहरी चोट लगी हैं।

अभी 3 दिन पहले उसकी मौत हो गई।

वो हमेशा कहता था कि आप उसे याद कर रही होगी।

आप अपना ख्याल रखना मौलिक की यही लास्ट विष थी।

लड़की फोन रख कर बस रोती रही।

वक़्त बीत गया पर आज भी वो लकड़ी जब फ़ेसबुक खोलती है तो उसे इंतजार रहता हैं कहीं मौलिक का मेसेज आ जाए खाना खाया तुमने?

इसलिए दोस्तों जिस से प्यार हो उसे दिल की बात बताने में देर न करे।




                    For More Stories Follow Our Website :- SB Entertainment

शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2020

पति और पत्नी ने क्या लिखा डायरी में?

अक्टूबर 23, 2020 0
पति और पत्नी ने क्या लिखा डायरी में?

 राज और सुमन की शादी को 15 साल हो गए थें। और दोनों ही एक दूसरें से बेहद प्यार करतें थें। मगर हर पति पत्नी की तरह उन दोनों में भी थोड़ी बहुत नोक जोक चलती रहती थी। जिससे कई बार सुमन जूझला जाती थीं। और सुमन बात बात पर अपने पति राज की गलतियाँ निकालती रहती थी।

 

और शायद थोड़ी बहुत लड़ाई से भी सुमन बहुत परेशान हो जाती थी। एक दिन सुमन अपनी शादी की सालगिरह पर दो डायरी लेकर आई और उसने एक डायरी अपने पति को देते हुए कहा कि राज तुम्हें मुझसें जितनी भी शिकायत हो और मुझमें जितनी भी कमियाँ हें तो वो सारी कमियाँ तुम हमारी अगली सालगिरह तक इस डायरी में लिख देना। और मुझे भी तुमसे जितनी भी शिकायत होगी वो सभी इस डायरी में लिख दूंगी।


 

और देखतें ही देखतें साल बीत गया। और जेसे ही उन दोनों की शादी की सालगिरह का दिन गया। तो सुमन नें अपनी लिखी हुई डायरी अपने पति राज को दे दी। और राज ने भी अपनी पत्नि सुमन की सभी शिकायते लिखकर उसे डायरी दे दी।

 

तभी राज अपनी पत्नी सुमन की डायरी पढ़ना शुरू करता हैं। उसकी पत्नी सुमन की डायरी में लिखा था।

 

तुमने पिछलें साल मझें अपने मम्मी डैडी के जन्मदिन पर जाने नहीं दिया। और इस करवा चौथ पर तुमने मुजे शौपिंग भी नहीं करवाई। और हनीमून पर शिमला जाएंगे कहते कहते तुम्हें 10 साल हो गए मगर अभी तक शिमला लेकर नहीं गए।

 

और तुम पिछले रविवार को मेरे साथ बाजार गए थें। तो बाज़ार से आते वक़्त मूझें गोलगप्पे खाने थें मगर तुमने यह कहकर मूझें गोलगप्पे खाने ही नहीं दिए कि सुमन जानू बाहर की चीजें कभी भी नहीं खानी चाहिए। और मूझें बिना गोलगप्पे खिलाएं ही घर वापस ले आए।

 

और फिर जब मैं ज्यादा नाराज हो गयी। तो फिर तुम खुद जाकर रात को बाजर से गोलगप्पे ख़रीदकर लेकर आए। आप मेरी हर ख्वाहिश पूरी जरूर करते हो। बस पहले मुझे बहुत नाराज कर देते हो। उसके बाद ही मेरी बात मानतें हो।

 

ये आदत आपकी बहुत गंदी हे। एसी ही जाने कितनी ही शिकायतों से डायरी के 10-12 पेज भरें हुए थें। उन सभी शिकायतों को पढ़ता रहा और उन्हें पढ़कर खूब हँसता रहा। मानो जैसे वो अपनी पत्नी से बिल्कुल भी खफा नहीं था।

 

अब राज की डायरी उसकी पत्नी सुमन पढ़ती हैं।

 

और जैसे ही सुमन अपनेे पति राज की डायरी को खोलकर पढ़ने लगती है। तो उसकी पत्नी ने क्या देखा कि डायरी तो पूरी खाली थी। और उसमें कुछ भी नहीं लिखा हुआ था। तो सुमन अपने पति से बहुत गुस्सा होकर बोली। कि राज तुमने मेरी दी हुई डायरी में कुछ भी नहीं लिखा।

 

और तुमने मेरी एक बात भी नहीं मानी। तभी राज ने डायरी का आखिरी पेज खोलकर अपनी पत्नी के सामने रख दिया। और उस पेज पर कुछ लिखा हुआ था। जिसे पढ़कर ही सुमन की आँखों से आँसू बहने लगें। डायरी के आखिरी पेज पर लिखा था।



कि सुमन तुम्हारें अंदर कुछ कमियों जरूर हे। मगर तुम्हारी अच्छाइयों को में इस डायरी में लिखूँगा तो शायद ये डायरी भी कम पड़ जाएगी। क्योंकि तुम अपने माता पिता को छोड़कर आई और यहाँ मेरे माता पिता को अपने माता पिता जेसा प्यार दिया। और उनको सम्मान दिया और मेरे बुरे वक़्त में तुमने मेरा कितना साथ दिया।

 

और जीवन में तुमनें मेरा कितना हौसला भी बढ़ाया। और जीवन में आने वाली सभी दुःख तकलीफ़ में तुमने कभी मेरा साथ नहीं छोड़ा। हर साल तुम मेरी लंबी उम्र के लिए करवाचौथ का व्रत भी रखती हो। और हाँ ऑफिस जाते वक़्त मुझे जो भी चीज चाहिए वो तुम मेरे ऑफिस जाने से पहले ही मेरे लिए तैयार रखती हो।

 

और तुम मुझसें इतना सारा प्यार भी तो करतीं हो। और ऐसी बहुत सारी तुम्हारे अंदर अच्छाइयों हे। सुमन की मैं इस डायरी मे क्या क्या लिखूँ बस मैं इस डायरी में इतना ही लिखूँगा की हर जन्म में तुम मेरी ही जीवन साथी बनना सुमन "तुम्हारा राज"

 

डायरी पढ़ते पढ़ते सुमन बहुत रोने लगी। रोते हुए वो अपने पति की बाहों में लिपट गयी। और कहने लगी कि राज मे भी कितनी पागल हूं ना। कि मैने जरा सी बात का इतना बड़ा पतंगड बना दिया। तभी उसका पति कहता हैं कि सुमन छोटी मोटी लड़ाइयाँ तो पति पत्नी के बीच होती ही रहतीं है।

 

इसका मतलब ये नहीं कि उनका प्यार कभी भी कम हो जाये। और सुमन तुम कभी भी ये मत सोचना कि तुम्हारें लिए मेरा प्यार कभी कम हो जायेगा। हमारे बीच चाहें जितने भी जगडे हो जाए। मैं तुम्हें हमेशा चाहता रहूँगा। ये बात  सुनतें ही सुमन के मन में अपने पति के लिए और भी इज्जत बड़ गयी।

तो दोस्तों पति पत्नी के बीच थोड़ी बहुत लड़ाईयां तो होती ही रहती है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि इससे आपका प्यार कभी भी कम हो जाए। तो अपने प्यार को हमेशा बरकरार रखो और हमेशा खुश रहो।



                          For More Stories Follow Our Website :- SB Entertainment

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020

सच्चा प्यार हो तो ऐसा

अक्टूबर 22, 2020 0
सच्चा प्यार हो तो ऐसा

राकेश और स्वेता एक दूसरें से बेहद प्यार करते थे वो दोनों एक ही कॉलेज में एक साथ ही पढ़ाई कर रहे थे और दोनों का अब कॉलेज में एक साथ पढ़ाई का आखिरी ही साल बचा हुआ था।

 

एक दिन स्वेता और राकेश एक पार्क में धुमनें के लिए गए तब स्वेता नें राकेश से पूछा की राकेश तुम मुझसें कितना प्यार करतें हों और तुम मुझसें शादी करोगें या बस यूं ही प्यार करके छोड़ दोगें।





 तभी राकेश नें स्वेता से कहा कि स्वेता आज तुम मुझसें ये कैसा सवाल पूछ रही हो तो स्वेता नें कहा कि राकेश ये सवाल में तुमसें इसलिए पूछ रही हूं क्योंकि मैं तुमसे बेहद प्यार करती हूं।

और मैं मन ही मन तुम्हें अपना सब कुछ मान चुकीं हूं और अगर तुमने मुझे कभी "छोड" भी दिया तो भी मैं तुम्हे भूल नही पाऊंगी ये कहते ही स्वेता की आँखों मे आंसू गए "स्वेता को इस तरह रोतें देख" राकेश ने सबसे पहेले उसके आँसू पोछे और फिर स्वेता को अपनी बाँहो में ले लिया और फिर उससे ये कहा कि पगली मैंने तुम्हें "छोड़ने के लिए" थोड़ी प्यार किया है।हमारा प्यार तो सात जन्मों तक रहेगा।

 और मैं जल्द ही अपनें घरवालों के साथ तुम्हारे पिताजी से तुम्हारा हाथ मांगने जरूर आऊंगा ये सुनते ही स्वेता बहुत खुश हो गयी और खुशी के मारे वो फिर से राकेश की बाहों मे लिपट गयी।

 और फिर वो दोनों ही अपने अपने घर चलें गए अब कुछ ही महीनों में दोनों की कॉलेज की पढ़ाई भी पूरी हो गयी थी। अब दिन दिन राकेश और स्वेता का भी प्यार बढ़ता ही जा रहा था।

 एक दिन राकेश स्वेता से फोन करके कहता हैं कि स्वेता आज मैं अपनें माता पिता के साथ तुम्हारें घर रहा हूँ। तुम्हारें और मेरे रिश्ते के लिए। ये बात सुनकर स्वेता बहुत ही ख़ुश होकर राकेश से कहती हैं।

राकेश आज तो तमने मुजे सरप्राइज ही कर दिया तुम जल्दी जाओ और मैं जल्दी ही तैयार हो जाती हूं। तो करीब एक घंटे में ही राकेश और उसके माता पिता स्वेता के घर पर पहुंच जाते हैं।

लेकिन जब राकेश स्वेता के घर पहुँचता हैं तो वो क्या देखता हैं कि स्वेता का तो इतना बड़ा घर था और वह मन ही मन ये सोचता है कि शायद स्वेता के पिताजी बहोत ही अमीर हैं।

लेकिन हमारा परिवार तो इनके आगे कुछ भी नहीं तभी राकेश नें स्वेता के घर की बैल बजाई बैल बजते ही स्वेता समझ जाती हैं कि राकेश गया और वो अपनें नौकर को मना कहकर खुद ही दरवाजा खोलने चली जाती हैं।




 

और राकेश उसके परिवार का स्वागत करतीं हैं और उन्हें अंदर लेकर जाती हैं।

अंदर जातें ही राकेश के माता पिता इतने बड़े घर को देखकर ये सोचतें हैं कि पता नहीं स्वेता के पिताजी ये रिश्ता करेंगे या नही।

तभी अचानक स्वेता के पिता भी जाते हैं और सभी के लिए नाश्ता पानी मँगवाते हैं। तो तभी राकेश के पिताजी ने राकेश के लिए स्वेता के पिताजी से स्वेता का हाथ मांग लिया।

तो स्वेता के पिताजी ने राकेश से पूछा कि बेटा तुम काम क्या करतें हों तब राकेश नें बड़ी ही प्यार से कहा कि अंकल जी मैंने रेलवे में बड़ी पोस्ट पर फॉर्म भर रखा हैं और मैंने उसके पेपर भी दे दिए हैं।

और बस अब रिजल्ट आना ही बाकी हैं। तभी स्वेता के पिताजी ने फिर ये पूछा कि उस रेलवे की पोस्ट पर तुम्हारी सैलरी कितनी होगी तो राकेश ने कहा कि अंकल जी यही कोई 35,000 के आसपास होगी।

ये सुनतें ही स्वेता के पिताजी ने राकेश से बहुत  ही गुस्से में कहा कि तुम्हें पता हैं कि 35,000 तो मेरी बेटी 5 दिन में खर्च कर देती हैं और तुम्हें शायद ये भी नहीं पता होगा कि मेरी बेटी स्वेता हर हफ़्ते 7 से 10 हजार की तो बाहर शॉपिंग करके ही खर्च कर देती हैं।

ये सुनतें ही राकेश के पिताजी ने भी गुस्से में स्वेता के पिताजी से ये कह दिया कि शायद आपको इस धन दौलत पर बहुत ही ज्यादा घमंड हैं।

रखिये अपनी घन दौलत अपने पास और अपनी बेटी की शादी किसी करोड़पति लड़के से करवाना तभी वो अपने बेटे राकेश का हाथ पकड़ कर ये कहते हैं कि चलों बेटा हम तेरा रिश्ता कहीं और करवा देंगे।

तभी राकेश स्वेता के पिताजी के आगे हाथ जोडक़र ये कहता कि अंकल जी मैं आपकी बेटी से बेहद प्यार करता हूं और स्वेता भी मुझसे बहुत प्यार करती हैं।

तो प्लीज़ इस रिश्ते के लिए आप मान जाइये और आपसे मै वादा करता हूं कि मैं आपकी  बेटी को जरा भी दुखी नहीं रखूँगा। ये सुनते ही स्वेता की भी आंखों में आंसू जाते हैं।

और वो भी अपने पिताजी से कहती हैं कि पिताजी में भी राकेश से बेहद प्यार करती हूं और में उसके बिना किसी ओर से कभी भी शादी नही कर पाउंगी। बेटी की ये बात सुनकर उसके पिताजी ने उसको एक थप्पड़ मार दिया।

तभी स्वेता रोती हुई अपने कमरें में चली गयी और स्वेता के पिताजी ने गुस्से में अपने नौकर से कहा कि इन लोगो को यहाँ से बाहर निकाल दो ये सुनते ही राकेश और उकसे माता पिता बड़े ही निराश होकर स्वेता के घर से चलें गए।

और जल्द ही स्वेता के पिताजी नें स्वेता कि एक बड़े घर में शादी तय कर दी और उन्होंने उसकी जबरदस्ती ही एक महीने के अंदर सगाई भी करवा दी।

उधर राकेश की रेलवे में नौकरी भी लग चुकी थीं। तब एक दिन अचानक स्वेता ने राकेश को फ़ोन करके ये कहा कि राकेश तुम कहाँ चले गए थें। मैंने कितनी बार तुम्हारा नंबर मिलाया लेकिन तुम्हारा नंबर बंद जा रहा था।

 और मैंने अपनी सहेली को भी कितनी बार तुम्हारें घर पर भेजा था मगर तुम्हारें घर तो ताला लगा हुआ था। फिर मुझें तुम्हारा एक दोस्त मिला तो मैंने उससे तुम्हारा नंबर लेकर तुम्हें फ़ोन किया हैं।

 मेरे पिताजी ने मेरी सगाई जबरदस्ती ही किसी और से करवा दी लेकिन में तुम्हारे बिना नहीं रह सकती तुम जल्दी यहाँ जाओ राकेश वरना में अपनी जान दे दूँगी।

 तब राकेश नें कहा कि स्वेता मैं भी तुमसे बेहद प्यार करता हूं लेकिन प्लीज़ तुम ऐसा कोई भी कदम मत उठाना की जिसकी वजह से तुम्हारें घरवालों को शर्मिंदा होना पड़े और स्वेता अगर हमारा प्यार सच्चा होगा तो हमें मिलने से कोई भी नही रोक सकता।

और स्वेता अगर हमने घर से भागकर शादी कर भी ली तो तुम्हें पता हैं जीवन के आने वाले वक़्त में हमारे बच्चें भी ऐसा ही करेंगे और फिर हमें भी शर्मिंदा होना पड़ेगा।

इसलिए स्वेता हमें हमारे प्यार पर पूरा विश्वाश रखना चाहिए और उस भगवान पर भी जिसनें हम दोनों को सच्चा प्यार करवाया। अब बस तुम वैसे ही करो जैसा तुम्हारें घरवाले तुमसे कह रहे हैं।

 ये बात कहते हुए राकेश की आँखों में आँसू रहे थें। लेकिन उसने अपना सारा दर्द छुपातें हुए स्वेता को गलत कदम उठाने से बचा लिया अब स्वेता नें रोते हुए राकेश से ये कहा कि राकेश मैं तुम्हारे कहनें से अपने परिवार की बात मानकर ये शादी जरूर कर लूंगी।

 मगर तुम ये बात याद रखना कि शादी करके किसी और के पास मेरा शरीर ही जायेगा मगर मेरी आत्मा हमेशा सिर्फ तुमसें ही प्यार करेगी।

 ये कहकर स्वेता रोती हुई फ़ोन को काट देती हैं। उधर राकेश भी बहुत रोता हुआ ज़मीन पर बैठ जाता हैं। अब स्वेता की शादी का दिन भी गया और अब तो उसके चौखट पर बारात भी गई थी।

 तभी अचानक जैसे ही स्वेता दुल्हन के जोड़ें में सीढ़ियों से नीचे उतर रहीं थीं वैसे ही उसे बड़ी ही तेजी से चक्कर गए और वो चक्कर खाकर सीढ़ियों से निचे की तरफ गिरती हुई चली गयी।

और नीचे गिरकर वो बेहोश हो गयी और स्वेता के सिर और पैर में बहुत ज्यादा चोट लग गयी थी। और शायद उसके पैर की हड्डी भी टूट गयी थीं। तभी स्वेता के पिताजी ने फटाफट एक एम्बुलेंस बुलवाई और जल्दी से वो उसे हॉस्पिटल लेकर गए।

 ओर तभी राकेश के एक दोस्त ने राकेश को भी फ़ोन कर के हॉस्पिटल ही बुला लिया। राकेश को हॉस्पिटल में देख कर स्वेता के पिताजी उसपर  बहुत गुस्सा होते है।

 मगर वहाँ उनके सभी रिश्तेदार होने के कारण वो उसे कुछ भी नहीं कह पातें। तभी डॉक्टर स्वेता का इलाज करके बाहर आतें हैं।तो स्वेता के पिताजी ने डॉक्टर से पूछा कि डॉक्टर क्या अब मेरी बेटी ठीक हैं।

 तब डॉक्टर कहता हैं कि उनके पैर की हड्डी कुछ ज्यादा ही टूट गयी इसलिए हमनें उसका छोटा सा ऑपरेशन कर दिया हैं। और हाँ अब शायद इसका पैर हल्का सा टेढ़ा भी रहेगा ये कहकर डॉक्टर वहाँ से चला जाता हैं।

 तब स्वेता के पैर के बारें में सुनकर स्वेता के होने वाले ससुर नें उसी वक़्त स्वेता से अपने बेटे की शादी के लिए बिल्कुल ही मना कर दिया।

 तभी स्वेता के पिताजी उसके आगे हाथ जोड़कर कहते हैं। कि समधी जी आप इस शादी के लिए कैसे मना कर सकतें हैं। हमारी सारी तैयारियां हो चुकी हैं और आप इन वक़्त पर इस इस शादी के लिए मना कर रहें हो। कृपया समधी जी हमारी इज्जत को समजीए और इस शादी के लिए मना मत करिए।

 आप चाहें तो मुझसे 10 से 20 लाख रुपये और ले लीजिए मगर मेरी बेटी को अपना लीजिए और मैं कुछ भी करके अपनी स्वेता का पैर बिल्कुल ठीक करवा दूँगा।

 तभी दुल्हे का बाप स्वेता के पिताजी का हाथ हटाते हुए गुस्से में कहता हैं कि तुम्हारी औकात ही क्या हैं मेरे सामने तुम मेरे बेटे को क्या 10 से 20 लाख रुपयो में खरीदना चाहते हो।

 तुम्हे पता भी हैं 10 से 20 लाख तो मेरा बेटा यूँ ही खर्च कर देता हैं। और तुम्हारी बेटी के साथ अपने बेटे की शादी में इसलिए करवा रहा था क्योंकि तुम्हारी बेटी बहुत ही सुंदर थी मगर अब तो उसका पैर ही टूट गया और हमारे यहाँ इसे अपशुकन कहते हैं।

 इसलिए में अभी के अभी तुम्हारी बेटी के साथ अपने बेटे का रिश्ता पूरी तरह तोड़ता हूँ ये कहकर वो अपने बेटे और पुरी बारात को वापस लेकर चला जाता है।

 और इस बात से दुखी होकर स्वेता के पिताजी हॉस्पिटल में ही बहुत रोने लग जातें है और उन्हें वो सारी बात याद जाती हैं जो उन्होंने राकेश के पिताजी से कही थीं।

 और उनकी बहुत बेज्जती भी की थी उसी तरह आज उनकी भी बेज्जती ही हो गयी और पैसा भी घरा का घरा ही रह गया ये बात सोचकर स्वेता के पिताजी बहुत दुखी हो रहे थे।

 कि तभी अन्दर से एक नर्स स्वेता को व्हील चेयर पर बाहर लेकर आई। और स्वेता भी बहुत ही रोनें लगी तभी स्वेता के पिताजी ने रोते हुए स्वेता से कहा कि बेटी अभी अभी तेरे होने वाले ससुर ने ये रिश्ता तोड़ दिया।

 वो दूल्हे ओर बारात को भी वापस ले गए तभी स्वेता अपने पिताजी का हौसला बढ़ाते हुए कहती हैं। कि पिताजी जो होता है अच्छे के लिए ही होता हैं। और आपकी बेटी का दूल्हा और बारात आपके बिल्कुल सामने ही खड़े है।

 तभी स्वेता के पिताजी देखते हैं कि राकेश और उसके पिताजी और राकेश के सभी दोस्त हाथ जोड़कर खड़े हुए थे। तभी स्वेता अपने पिताजी से कहती है। कि पिताजी अब फैसला आपके हाथों में हैं।

 कि आपको अपनी धन दोलत के बराबरी वाला लड़का चाहिए है या आपकी इज्जत करने वाला और मुजे सच्चा प्यार करने वाला।

 ये सुनते ही स्वेता के पिताजी राकेश के पिताजी के पास जाकर हाथ जोड़कर माफी मांगते हैं। और कहते हैं कि उस दिन मैने आपकी इतनी ज्यादा बेज्जती की थीं उसके लिए मै आपसे माफ़ी मांगता हूं। कृपया मुजे माफ़ कर दीजिए।

उस वक़्त मैं अपनी धन दौलत में अंधा हो चुका था। तभी राकेश के पिताजी ये कहते है कि आप ये माफी वाफ़ी छोड़िए। और राकेश ओर स्वेता की शादी की तैयारिया कीजिये।

 तब सभी लोग शादी में पहुँच जाते हैं। स्वेता के पिताजी भी बहुत ही खुश हो जाते हैं।

लेकिन स्वेता के तो पैर में चोट लगी हुई थीं। तो शादी में फेरे कैसे हो पातें। तभी राकेश ने स्वेता को अपनी गोद में उठा लिया।

 और गोद में उठाकर राकेश ने सारी रस्में पूरी कर दी। और राकेश ने स्वेता से कहा कि मैने कहा था ना स्वेता अगर हमारा प्यार सच्चा होगा तो वो जरूर मिलेगा।

 ये सुनते ही स्वेता बहुत ही ख़ुश हो जाती हैं और राकेश की गोद में बैठे बैठे ही उसकी बाहों में लिपट जाती हैं। और मिल जाता हैं राकेश और स्वेता का सच्चा प्यार।

तो  दोस्तो इस कहानी में स्वेता के पिताजी को भी सबक मिल गया और राकेश स्वेता का भी प्यार मिल गया। 



For More Stories Follow Our Website :- SB Entertainment